केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) आज यानी शनिवार को एक नई देशव्यापी मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणाली की शुरुआत करेंगे, जिसका उद्देश्य आपातकालीन चेतावनियों को नागरिकों तक और तेज़ व प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। यह प्रणाली Department of Telecommunications ने National Disaster Management Authority के सहयोग से विकसित की है, ताकि संकट की स्थितियों में अहम जानकारी तुरंत साझा की जा सके।

भेजे जाते हैं एसएमएस अलर्ट

इस पहल की नींव “सचेत” नामक एकीकृत चेतावनी प्रणाली है, जिसे देश के सभी 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश में पहले ही लागू किया जा चुका है। C-DOT द्वारा तैयार इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से मोबाइल उपयोगकर्ताओं को स्थान-विशेष के आधार पर एसएमएस अलर्ट भेजे जाते हैं। यह प्रणाली International Telecommunication Union के कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल मानक का पालन करती है।

19 से अधिक भाषाओं में भेजे जा चुके हैं संदेश

देशभर में आपदा प्रबंधन एजेंसियां इस व्यवस्था का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रही हैं। अब तक 19 से अधिक भाषाओं में 134 अरब से ज्यादा संदेश भेजे जा चुके हैं, जिनमें प्राकृतिक आपदाएं, खराब मौसम और चक्रवात जैसी घटनाओं से जुड़ी चेतावनियां शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां आपदाओं के असर को कम करने और जान बचाने में कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी हैं।

जोड़े गए है सेल ब्रॉडकास्ट

अलर्ट की गति और पहुंच को और बेहतर बनाने के लिए, सरकार ने मौजूदा एसएमएस प्रणाली के साथ “सेल ब्रॉडकास्ट” तकनीक भी जोड़ी है। यह तकनीक किसी खास क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल उपकरणों पर एक साथ संदेश भेज सकती है, जिससे नेटवर्क व्यस्त होने पर भी सूचना तुरंत मिल जाती है।

देशभर में भी किया जाएगा परीक्षण

अधिकारियों के अनुसार, एसएमएस और सेल ब्रॉडकास्ट का यह संयोजन भारत की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत, तेज़ और सुलभ बनाएगा। इसके तहत देशभर में परीक्षण भी किया जाएगा, जिसमें दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों में लोगों को हिंदी, अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में परीक्षण संदेश मिल सकते हैं। सरकार ने साफ किया है कि ये केवल परीक्षण संदेश होंगे और इन्हें लेकर घबराने या किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।

Written By Toshi Shah