लाइफस्टाइल
गांजा या तम्बाकू... कौन हैं ज्यादा खतरनाक? रिसर्च ने खोल दी सच्चाई
युवाओं में तेजी से बढ़ती नशे की आदत आखिर क्यों चिंता का विषय बनती जा रही है और इसका दिमाग और सेहत पर क्या असर पड़ सकता है, आइए समझते हैं।
आज के दौर में गांजा (वीड) और तम्बाकू जैसे नशीले पदार्थों का उपयोग खासकर Gen-Z और Millennials के बीच तेजी से बढ़ रहा है। ये चीजें अब सिर्फ आदत नहीं रहीं, बल्कि कई जगहों पर लाइफस्टाइल और कल्चर का हिस्सा बनती जा रही हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी हो जाता है कि ये न्यूरोएक्टिव ड्रग्स हमारे दिमाग पर किस तरह असर डालते हैं और लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से क्या नुकसान हो सकते हैं।
एक चिंताजनक ट्रेंड
गांजा का इस्तेमाल दुनियाभर में लगातार बढ़ रहा है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार करीब 23 करोड़ लोग हर साल इसका सेवन करते हैं, जो वैश्विक आबादी का लगभग 4.4% है। वहीं तम्बाकू का उपयोग इससे भी ज्यादा व्यापक है। 2020 की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया की लगभग 30 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में तम्बाकू का सेवन करती है। यह हर साल करीब 80 लाख मौतों का कारण बनता है, और इसका असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर ज्यादा पड़ता है।
रिसर्च में क्या आया सामने?
हाल ही में एक अध्ययन में विभिन्न शोध विधियों (जैसे Cross-sectional, Longitudinal और Mendelian Randomization) का उपयोग करके गांजा और तम्बाकू के दिमाग पर प्रभाव को समझने की कोशिश की गई। हालांकि इस क्षेत्र में अभी डेटा सीमित है और कई स्टडीज में सैंपल संतुलित नहीं थे—जैसे गांजा से जुड़ी स्टडीज में पुरुष ज्यादा थे, जबकि तम्बाकू से जुड़ी स्टडीज में महिलाएं अधिक थीं।
कुछ महत्वपूर्ण बातें आईं सामने
कुछ मामलों में गांजा के उपयोग से दिमाग के अमिगडाला हिस्से का आकार छोटा पाया गया, लेकिन यह प्रभाव हर उम्र में समान नहीं था। तम्बाकू उपयोग करने वालों में दिमाग के कई हिस्सों, खासकर ग्रे मैटर, में कमी देखी गई। तम्बाकू से दिमाग में सूजन और नुकसान की संभावना बढ़ सकती है, जबकि गांजा में मौजूद CBD कुछ हद तक सुरक्षात्मक प्रभाव दिखा सकता है। दोनों पदार्थों को एक साथ लेने के प्रभाव पर अभी पर्याप्त शोध उपलब्ध नहीं है।
निष्कर्ष
यह अध्ययन उन शुरुआती प्रयासों में से एक है जिसमें गांजा और तम्बाकू के उपयोग को दिमाग के आकार में बदलाव से जोड़कर देखा गया है। निष्कर्ष बताते हैं कि तम्बाकू का असर ज्यादा स्पष्ट और भरोसेमंद रूप से सामने आता है, खासकर उन हिस्सों में जो याददाश्त और भावनाओं से जुड़े होते हैं। गांजा के प्रभाव को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है, और इस क्षेत्र में और गहन शोध की आवश्यकता है।
Written By Toshi Shah
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