लाइफस्टाइल
शॉर्ट वीडियो की लत से बिगड़ सकता है बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, स्टडी में ये बात आई सामने
वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया भर में आज युवा अपना ज्यादा से ज्यादा समय शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर बिता रहे हैं।
इंस्टाग्राम आज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में से एक बन चुका है, जहां लोग घंटों तक रील्स देखने, स्टोरी लगाने और चैटिंग में व्यस्त रहते हैं। खासकर रील्स का क्रेज बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों में देखा जा रहा है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक रिसर्च में यह चिंता जताई गई है कि लगातार शॉर्ट वीडियो देखने की यह आदत मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
लगातार रील्स देखने से बढ़ सकता है तनाव
जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ बायरॉथ के शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक स्टडी के अनुसार, लंबे समय तक शॉर्ट वीडियो देखने से बच्चों और युवाओं में तनाव बढ़ने की संभावना रहती है। इसके साथ ही उनका ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी कमजोर हो सकती है। यह अध्ययन जून में European Child & Adolescent Psychiatry जर्नल में प्रकाशित हुआ था। शोधकर्ताओं का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी काफी समय शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर बिता रही है, जिसका असर उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है।
रील्स की आदत बढ़ाने वाले मुख्य कारण
स्टडी में तीन प्रमुख वजहें सामने आईं, जो लोगों को लगातार रील्स देखने के लिए मजबूर करती हैं। पहला, हर समय नया कंटेंट मिलते रहना, जिससे उपयोगकर्ता ऐप छोड़ नहीं पाते। दूसरा, अनलिमिटेड स्क्रॉलिंग फीचर, जो कभी खत्म नहीं होता और लोगों को लंबे समय तक व्यस्त रखता है। तीसरा, पर्सनलाइज्ड एल्गोरिदम, जो यूज़र की पसंद के अनुसार ही वीडियो दिखाता है, जिससे उनका जुड़ाव और बढ़ जाता है।
बड़े स्तर पर किया गया विश्लेषण
इस शोध में लगभग 42 अलग-अलग रिसर्च ग्रुप्स के डेटा का विश्लेषण किया गया और करीब 47,000 लोगों को शामिल किया गया, जिनकी औसत उम्र लगभग 16 वर्ष थी। अध्ययन में यह पाया गया कि शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि लोग उनसे जल्दी अलग नहीं हो पाते। लगातार नए वीडियो आने से उपयोगकर्ता लंबे समय तक स्क्रॉल करते रहते हैं।
बच्चों को कैसे बचाया जा सकता है
विशेषज्ञों का सुझाव है कि माता-पिता अगर बच्चों के लिए एक संतुलित डिजिटल रूटीन बनाएं और मोबाइल इस्तेमाल का समय सीमित करें, तो इसका असर कम किया जा सकता है। बच्चों को बाहर खेलने, खेलकूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों में शामिल करना भी जरूरी है। साथ ही परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने से बच्चों की सोशल मीडिया पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है।
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