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सुप्रीम कोर्ट का SIR पर बड़ा फैसला, कहा- चुनाव आयोग का ये अधिकार है, प्रक्रिया में कोई खामी....
सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के उस फ़ैसले को सही ठहराया है, जिसके तहत बिहार में वोटर लिस्ट का 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न' (SIR) शुरू किया गया था।
बिहार में SIR को लेकर आज 'सुप्रीम' फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग की शक्तियां बरकरार है। SIR की प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है और यह प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक है। असल में याचिकाओं में पहले दावा किया गया था कि संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत चुनाव आयोग को इतने बड़े स्तर पर SIR कराने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर इस प्रक्रिया को अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि यह सामान्य या नियमित मतदाता सूची संशोधन की पारंपरिक प्रक्रिया से अलग है।
कोर्ट ने कही ये बात
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा SIR अपनाना उसकी अधिकार-सीमा से बाहर (ultra vires) नहीं माना जा सकता, क्योंकि कानून खुद आयोग को यह अनुमति देता है कि वह आवश्यकता पड़ने पर विशेष परिस्थितियों में अलग प्रक्रिया अपना सके।
सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान सभी दलीलों का अध्ययन किया
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले में सभी पक्षों की दलीलों, घटनाक्रम और रिकॉर्ड का विस्तार से अध्ययन किया गया है। इसके आधार पर अदालत ने तीन प्रमुख सवालों पर ध्यान केंद्रित किया:
- क्या चुनाव आयोग के पास SIR जैसी प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है।
- क्या यह कार्रवाई किसी वैध उद्देश्य को पूरा करने के लिए की गई है और क्या अपनाए गए उपाय उस उद्देश्य के अनुरूप हैं।
- क्या यह प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के नियमों का उल्लंघन करती है या नहीं।
अदालत ने अपने विचार में यह भी कहा कि जब कानून स्वयं चुनाव आयोग को किसी भी समय और उचित कारणों के आधार पर विशेष संशोधन की अनुमति देता है, तो केवल इस वजह से कि यह सामान्य प्रक्रिया से अलग है, इसे अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।
EC के पास वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने से इनकार का अधिकार-SC
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता से जुड़ी जांच केवल मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम शामिल करने या हटाने के सीमित संदर्भ में ही की जा सकती है। अदालत ने साफ किया कि चुनाव आयोग ने भी इसी सीमित सवाल पर विचार किया है और ऐसी किसी भी जांच को कानून की निर्धारित सीमाओं के भीतर ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह आकलन केवल परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों के संदर्भ में होगा। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची में नाम शामिल करने से इनकार करने का अधिकार है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई को नागरिकता तय करने की प्रक्रिया नहीं माना जा सकता।
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