नई दिल्ली: लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने 27 सितंबर को अपनी NSA हिरासत के एक साल पूरे होने पर केंद्र सरकार से लद्दाख के मुद्दों पर ठोस प्रगति की मांग की। वांगचुक ने कहा कि अगर 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती तक जमीन पर कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ तो शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का रास्ता अपनाने पर विचार किया जाएगा।

'एक साल बीत गया, लेकिन जवाब नहीं मिला'
ANI से बातचीत में वांगचुक ने कहा कि वह दिल्ली इसलिए आए हैं ताकि देश को बताया जा सके कि लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा को एक साल पूरा हो गया है। उन्होंने लेह हिंसा की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए।

वांगचुक ने कहा कि हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों को उचित मुआवजा, लंबित मामलों और जवाबदेही को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं। उन्होंने पूछा कि जांच आयोग के नतीजे कब सामने आएंगे और संबंधित अधिकारी इन घटनाओं को लेकर कब जवाब देंगे।

2 अक्टूबर तक ठोस प्रगति की उम्मीद
वांगचुक ने कहा कि गांधी जयंती से पहले सरकार के साथ बातचीत में कुछ ठोस प्रगति देखने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर वास्तविक बदलाव दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो नागरिकों के तौर पर शांतिपूर्ण विरोध और प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसी स्थिति नहीं आएगी।

भूमि और पर्यटन नीति को लेकर भी सवाल
वांगचुक ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों से पर्याप्त परामर्श के बिना भूमि, औद्योगिक नीति, पर्यटन और स्थानीय शासन से जुड़े फैसले किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, अगर लोकतांत्रिक ढांचे के आने से पहले ही महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले हो जाते हैं तो स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका क्या रह जाएगी।

2025 में हुई थी लेह में हिंसा
24 सितंबर 2025 को लद्दाख के लेह में राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। इस दौरान चार लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। इसके बाद प्रशासन ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था और उन्हें जोधपुर जेल भेजा गया था। बाद में मार्च 2026 में उन्हें रिहा कर दिया गया।

20 लोगों के खिलाफ केस वापस
वांगचुक के बयान से कुछ दिन पहले, 23 सितंबर को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 2025 की लेह हिंसा से जुड़े 20 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने को मंजूरी दी थी। प्रशासन के मुताबिक यह फैसला शांति, सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव के व्यापक हित में लिया गया। इन 20 लोगों में हिंसा में मारे गए चार लोग भी शामिल थे।

केंद्र के साथ बातचीत में क्या हुआ?
लद्दाख की मांगों को लेकर लेह एपेक्स बॉडी (LAB), कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) और केंद्र सरकार के बीच बातचीत जारी है। सितंबर में हुई बैठकों में स्थानीय आबादी के हितों की संवैधानिक सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान पर भी चर्चा हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र की ओर से अनुच्छेद 371 के तहत विशेष प्रावधान का विकल्प चर्चा में आया है।
वांगचुक का कहना है कि अब बातचीत के साथ-साथ जमीन पर ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए। 2 अक्टूबर की समयसीमा को लेकर उन्होंने फिलहाल शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध की संभावना जताई है।