नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। दिपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

दिपके ने आरोप लगाया कि देशभर में 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। हालांकि, यह संख्या और इसके पीछे की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के तहत 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग की प्रक्रिया में मृत, डुप्लीकेट, स्थानांतरित या पात्रता मानदंड पूरा नहीं करने वाले नामों की पहचान और हटाने का प्रावधान है।

'इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाना लोकतंत्र के लिए सवाल'
दिपके ने दावा किया कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव का कोई राजनीतिक उद्देश्य है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच वोटों के अंतर को देखते हुए मतदाता सूची में बदलाव किए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आया है।

चुनाव आयोग के भीतर भी सामने आई आपत्तियां
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर भी सवाल उठे हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों में मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने के साथ-साथ मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल थे।

हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि आयोग के फैसले, जिनमें SIR भी शामिल है, सभी चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं।

दिपके ने विपक्षी नेताओं के क्षेत्रों को लेकर भी लगाए आरोप
CJP प्रमुख ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और दिल्ली समेत कई राज्यों में प्रमुख विपक्षी नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में वोटर नाम हटाए गए। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी के क्षेत्र में 50 हजार, एमके स्टालिन के क्षेत्र में एक लाख और अरविंद केजरीवाल के क्षेत्र में 40 हजार नाम हटाए गए।

दिपके ने इन आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया कि यह महज संयोग नहीं हो सकता और मतदाता सूची में बदलाव के पीछे एक पैटर्न है। इन विशिष्ट दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।

'क्या इसे फ्री एंड फेयर चुनाव कहा जा सकता है?'
दिपके ने सवाल उठाया कि अगर किसी चुनाव में विपक्षी ताकतों के मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हट जाएं तो क्या उसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कहा जा सकता है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए चुनाव आयोग में सुधार की जरूरत बताई।

SIR विवाद के बीच CJP ने चुनाव आयोग के कामकाज और मताधिकार के मुद्दे को लेकर दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का भी ऐलान किया था। पार्टी ने इसे 'Hijacking of India's Democracy' थीम से जोड़कर अभियान चलाने की बात कही है।