नई दिल्ली : दिल्ली-NCR में नाबालिग से कथित गैंगरेप के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया। मामला एक चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय लड़की से कथित गैंगरेप से जुड़ा है। अदालत ने दिल्ली-NCR में सामने आ रहे दुष्कर्म के मामलों पर चिंता जताते हुए सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि दिल्ली-NCR में दुष्कर्म के मामलों की खबरें कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक प्रशासन की ओर से बुनियादी सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक व्यवस्थित विफलता की ओर इशारा करती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के निर्भया मामले का किया जिक्र

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-NCR में सामने आ रही ऐसी घटनाएं 2012 के निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले की दर्दनाक यादें ताजा करती हैं। अदालत ने सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। पीठ के मुताबिक, पर्याप्त रोशनी, निगरानी और अन्य प्रशासनिक सुविधाओं की कमी के कारण पार्क और बस जैसे सार्वजनिक स्थानों को हाई-रिस्क जोन में तब्दील नहीं होने दिया जा सकता।

चलती स्लीपर बस में कथित गैंगरेप का मामला

यह मामला 16 वर्षीय लड़की से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, लड़की 4 अगस्त को ग्रेटर नोएडा से एक स्लीपर बस में सवार हुई थी। आरोप है कि बस के चालक और कंडक्टर ने उसके साथ चलती बस में गैंगरेप किया।

आरोप है कि बाद में लड़की को पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके के पास छोड़ दिया गया। घटनाक्रम के सिलसिले में बस के चालक और कंडक्टर को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में सार्वजनिक परिवहन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता सामने आई। अदालत ने संकेत दिया कि केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी, प्रकाश व्यवस्था और प्रशासनिक सुरक्षा उपायों को मजबूत करना जरूरी है।

यह मामला 2012 के निर्भया कांड की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है, जिसने देश में महिलाओं की सुरक्षा और यौन अपराधों से जुड़े कानूनों को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया था।

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