नई दिल्ली: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष का हमला और तेज हो गया है। INDIA ब्लॉक की बैठक के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी गंभीर आरोप लगाए। बता दें कि राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को चुनाव में कथित 'वोट चोरी' के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ये आरोप कांग्रेस नेता ने लगाए हैं।
वहीं राहुल गांधी ने लिखा, 'सवाल- CEC ज्ञानेश कुमार ही ऐसे भारतीय क्यों हैं, जिन्हें आजीवन कानूनी सुरक्षा मिली हुई है? जवाब- क्योंकि PM मोदी उनका इस्तेमाल चुनाव चुराने के लिए करते हैं।' उनके इस बयान के बाद चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को लेकर राजनीतिक बहस और तीखी हो गई है।
INDIA ब्लॉक की बैठक में CEC के इस्तीफे की मांग
बुधवार को दिल्ली में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। खरगे ने SIR प्रक्रिया को वापस लेने, मतदाता सूची में पारदर्शिता बढ़ाने और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।
खरगे ने कहा कि CEC पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों ने कथित तौर पर 10 महीने में 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अगर वह पद पर बने रहते हैं तो चुनावी संस्थान की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठते रहेंगे। यह खरगे का राजनीतिक आरोप और मांग है।
13.3 करोड़ वोटरों के नाम हटाने का दावा
खरगे ने SIR को लेकर दावा किया कि 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस की ओर से मांग की गई है कि भविष्य के चुनावों में SIR से पहले वाली मतदाता सूची का इस्तेमाल किया जाए और नाम जोड़ने, हटाने तथा सुधार की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटने के आंकड़ों और SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मतभेद हैं। चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं का बचाव किया है और कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय होना संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है।
14 बार आपत्तियों का मुद्दा क्या है?
विवाद की एक बड़ी वजह द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट है। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। विपक्ष ने इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर CEC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इसी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है।
चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव बढ़ा
INDIA ब्लॉक की बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, TMC, RJD, NCP (SP), शिवसेना (UBT), JMM, CPI, CPM, JKNC समेत कई विपक्षी दल शामिल हुए। बैठक का मुख्य मुद्दा चुनावी प्रक्रिया, SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर आगे की रणनीति रहा। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग में अधिक पारदर्शिता, मतदाताओं को नाम हटाए जाने की जानकारी देने, अपील का प्रभावी अवसर देने और चुनावी प्रक्रिया में संस्थागत जवाबदेही की मांग की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग इन आरोपों का खंडन करते हुए अपनी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप बताता रहा है।