नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की शिक्षा व्यवस्था नहीं चाहती कि छात्र सोचें या सवाल पूछें। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की पूरी व्यवस्था शिक्षा से इसलिए परेशान है क्योंकि वह नहीं चाहती कि छात्र सोचें और सवाल पूछें।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में एक गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट की पोस्ट का हवाला दिया। इस पोस्ट में डॉ. बीआर आंबेडकर की 'Annihilation of Caste' और ज्योतिबा फुले की 'Gulamgiri' जैसी किताबों को युवाओं के दिमाग में 'जहर' भरने वाली सामग्री के तौर पर बताया गया था।
मोदी जी सामाजिक न्याय और बराबरी के ख़िलाफ़ हैं। उनका पूरा सिस्टम शिक्षा से नफ़रत करता है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि छात्र सोचें या सवाल पूछें।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 30, 2026
इसका ताज़ा सबूत देखिए।
एक गुमनाम ट्वीट में बाबासाहेब अंबेडकर की "जाति का विनाश", ज्योतिबा फुले की "गुलामगिरी" जैसी कई ज़रूरी किताबों को… pic.twitter.com/u7ysaX6tx4
राहुल गांधी ने दावा किया कि इस पोस्ट के अगले ही दिन, 27 सितंबर को प्रधानमंत्री कार्यालय के संदर्भ के बाद शिक्षा मंत्रालय ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों से उनके पाठ्यक्रमों को लेकर जानकारी मांगी। मंत्रालय ने संबंधित पाठ्यक्रमों पर विश्वविद्यालयों की टिप्पणियों के साथ-साथ उनमें पढ़ने वाले छात्रों की संख्या की जानकारी भी मांगी थी।
ट्रोल्स की बात पर तुरंत कार्रवाई
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चुप रहने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि इंटरनेट पर किसी ट्रोल की ओर से ऐसी टिप्पणी किए जाने पर सरकार तुरंत सक्रिय हो जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को सवाल पूछने और स्वतंत्र रूप से सोचने की जगह शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्टों के मुताबिक, 26 सितंबर को X पर एक गुमनाम अकाउंट से विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाने वाली कई पुस्तकों और लेखकों को लेकर पोस्ट की गई थी। इसमें आंबेडकर की 'Annihilation of Caste', ज्योतिराव फुले की 'Gulamgiri', पेरियार की रचनाओं और अन्य लेखकों के कार्यों का उल्लेख किया गया था। पोस्ट में इन रचनाओं को युवाओं के लिए 'जहर' बताया गया था।
इसके बाद 27 सितंबर को उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी की ओर से कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों को ईमेल भेजा गया। इसमें संबंधित X पोस्ट का हवाला देते हुए विश्वविद्यालयों से इस पर अपनी टिप्पणी देने और संबंधित पाठ्यक्रमों में छात्रों के नामांकन का ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा गया। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वायत्तता, पाठ्यक्रम तय करने की प्रक्रिया और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर बहस को जन्म दिया है।