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अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था पर उठे सवाल, SIT ने सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट
एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत कर दी है और विस्तृत अंतिम रिपोर्ट अगले 15 दिनों में सौंपे जाने की बात कही है।
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले में जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच टीम) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में चढ़ावे के प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था से जुड़ी कई खामियों का उल्लेख किया गया है। जांच के दौरान एसआईटी ने बताया कि मंदिर में दान मुख्य रूप से हुंडी, ऑनलाइन माध्यमों और रसीद के जरिए नकद जमा कराने की व्यवस्था से प्राप्त होता है।
पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाण या सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं
जांच में मंदिर ट्रस्ट के बैंक खातों और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। इसके आधार पर पता चला कि सामान्य परिस्थितियों में हर महीने लगभग 25 लाख श्रद्धालु राम मंदिर दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि कुंभ अवधि के दौरान यह संख्या एक महीने में करीब एक करोड़ तक पहुंच गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, औसतन प्रत्येक श्रद्धालु 15 से 18 रुपये तक का दान करता है। हालांकि इस अनुमान में अनाज, तेल, घी तथा सोने-चांदी के आभूषणों जैसे दानों को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इनके संबंध में पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाण या सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। एसआईटी ने बैंक विवरण और श्रद्धालुओं की संख्या के तुलनात्मक अध्ययन में दान राशि में असामान्य उतार-चढ़ाव दर्ज किया।
चढ़ावे की गणना प्रक्रिया और उसकी निगरानी के लिए गठित समिति पर उठाएं गए सवाल
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ महीनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के बावजूद दान की राशि अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई। इस संबंध में पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने बताया कि उन अवधियों में नोटों की तुलना में सिक्कों का दान अधिक प्राप्त हुआ था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मंदिर परिसर में कुछ कर्मचारी ऐसे कार्य कर रहे थे जिनकी नियुक्ति या जिम्मेदारियों के संबंध में कोई स्पष्ट लिखित आदेश उपलब्ध नहीं था। एसआईटी ने चढ़ावे की गणना प्रक्रिया और उसकी निगरानी के लिए गठित समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित कुछ पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को जांच योग्य बताया गया है। इसके अलावा कर्मचारियों की नियुक्तियों में भी प्रक्रियागत अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव भी दिए गए हैं।
कर्मचारियों की आय और संपत्ति में वृद्धि
रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि कुछ कर्मचारियों की आय और संपत्ति में पिछले पांच वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। जांच के क्रम में एसआईटी ने 60 से अधिक लोगों से पूछताछ की तथा सीसीटीवी फुटेज का भी विश्लेषण किया। हालांकि अब तक यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हो सका है कि कुल कितना चढ़ावा प्राप्त हुआ और उसका स्रोत क्या था। इसी कारण कथित चोरी हुई या नहीं तथा यदि हुई तो उसकी मात्रा कितनी थी, इसका ठोस निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निकालना फिलहाल संभव नहीं बताया गया है।
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