नई दिल्ली: हिंदी साहित्य के महान कवि और ‘राष्ट्रकवि’ के रूप में प्रसिद्ध रामधारी सिंह दिनकर की 23 सितंबर यानि आज 118वीं जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही प्रधानमंत्री ने दिनकर की कविताओं को जनचेतना, राष्ट्रीय स्वाभिमान, शौर्य और आत्मगौरव से जोड़ते हुए कहा कि उनकी कालजयी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी।

23 सितंबर 1908 को हुआ था जन्म

रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में उनकी कविताओं ने राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना को स्वर दिया। उनकी लेखनी में खास तौर पर वीर रस, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना और आत्मसम्मान के भाव प्रमुख रहे।

दिनकर को आगे चलकर ‘राष्ट्रकवि’ के रूप में व्यापक पहचान मिली। वह केवल कवि ही नहीं थे, बल्कि निबंधकार, लेखक, चिंतक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति भी रहे। वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे।

PM मोदी ने X पर क्या लिखा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिनकर की जयंती पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। PM मोदी ने लिखा कि दिनकर की ओजस्वी कविताएं आज भी देशवासियों में शौर्य, तेज और आत्मगौरव का संचार करती हैं।

उन्होंने कहा कि दिनकर की रचनाओं ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को भी प्रेरित किया। प्रधानमंत्री ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को ऐसा बताया जो आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।

PM मोदी की X पोस्ट: 

योगी आदित्यनाथ ने भी दी श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दिनकर को हिंदी साहित्य का शीर्ष व्यक्तित्व बताते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि दिनकर की निष्पक्ष और निर्भीक लेखनी ने राष्ट्रीय स्वाभिमान को जगाया और लोगों की चेतना में नई ऊर्जा पैदा की। योगी ने उनके साहित्य को भारतीय संस्कृति और मूल्यों को मजबूत करने वाला बताया।

नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान ने भी किया नमन

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दिनकर को महान कवि और लेखक बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें हिंदी का ‘अनन्य सेवक’ बताया और कहा कि उनकी रचनाएं साहित्य की दुनिया में हमेशा महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।

‘रश्मिरथी’ से ‘उर्वशी’ तक, ये हैं दिनकर की बड़ी रचनाएं

दिनकर की साहित्यिक प्रतिभा सिर्फ वीर रस की कविताओं तक सीमित नहीं थी। उन्होंने कविता, महाकाव्य, निबंध, आलोचना और इतिहास सहित कई विधाओं में लिखा।

उनकी प्रमुख रचनाओं में—

* रश्मिरथी
* कुरुक्षेत्र
* उर्वशी
* रेणुका
* हुंकार
* परशुराम की प्रतीक्षा
* संस्कृति के चार अध्याय
* सामधेनी
* धूप और धुआं
* दिनकर की डायरी

जैसी कृतियां शामिल हैं।

इनमें ‘रश्मिरथी’ में कर्ण के जीवन और व्यक्तित्व को केंद्र में रखा गया, जबकि ‘कुरुक्षेत्र’ में महाभारत की पृष्ठभूमि के जरिए युद्ध और मानवता जैसे सवालों को सामने रखा गया। ‘उर्वशी’ दिनकर की रचनात्मकता का अलग आयाम दिखाती है, जिसमें प्रेम, सौंदर्य और मानवीय भावनाओं को प्रमुखता मिली।

‘उर्वशी’ के लिए मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार

दिनकर को उनकी काव्य-कृति ‘उर्वशी’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था। इसके अलावा उन्हें ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार और भारत सरकार की ओर से पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

‘संस्कृति के चार अध्याय’ में भारतीय संस्कृति के विकास और अलग-अलग ऐतिहासिक-सांस्कृतिक प्रभावों पर विचार किया गया है। यह दिनकर के कवि से आगे बढ़कर एक गंभीर चिंतक और लेखक होने को भी सामने लाती है।

आज भी क्यों याद किए जाते हैं दिनकर?

दिनकर की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनकी भाषा की ऊर्जा और विषयों की व्यापकता है। उनकी रचनाओं में देशभक्ति और वीरता के साथ सामाजिक चेतना, मानवीय संघर्ष, प्रेम, सौंदर्य और संस्कृति जैसे विषय भी दिखाई देते हैं।

24 अप्रैल 1974 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी रचनाएं आज भी हिंदी साहित्य के पाठकों के बीच पढ़ी जाती हैं। उनकी 118वीं जयंती पर सामने आए श्रद्धांजलि संदेशों में भी इसी साहित्यिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना में उनके योगदान को याद किया गया।

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