चुनाव आयोग में मतभेद और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस आज देशभर में चुनाव आयोग के दफ्तरों तक विरोध मार्च निकालने की तैयारी में है। इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
SIR समेत वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर उठे सवाल
विवाद की शुरुआत उस रिपोर्ट के बाद हुई, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने और हटाने, वोटर डेटा के प्रबंधन, फॉर्म-6 में बदलाव और SIR से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
CEC के इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस रिपोर्ट को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि आयोग के भीतर दर्ज की गई आपत्तियों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए और CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके ने भी CEC के खिलाफ अभियान चलाने का संकेत दिया है। पार्टी ने इस्तीफे के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने की बात कही है।
ज्ञानेश कुमार का मेरठ कार्यक्रम स्थगित
इस राजनीतिक विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार का मेरठ में प्रस्तावित कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को ही लिया जा चुका था और इसका मौजूदा विवाद से संबंध नहीं है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर क्या सामने आया?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई मामलों में लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, नए मतदाताओं के लिए Form-6 में किए गए बदलाव, चुनावी डेटा के केंद्रीकरण और आयोग के तकनीकी सिस्टम से जुड़े सवाल शामिल थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक मामले में पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम बरकरार रखने से जुड़े न्यायिक अधिकारियों के फैसलों के खिलाफ अपील दाखिल किए जाने पर भी सवाल उठाया गया था।
विपक्ष के दूसरे कदम
कांग्रेस के विरोध मार्च के अलावा बिहार में RJD ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने CEC के खिलाफ संसद में हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी उठाई है।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर बेंच में भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित आपत्तियों से जुड़े मुद्दों को लेकर याचिका दायर की गई है।
इसके अलावा, वकील ब्रजेश सिंह ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित अवमानना के मामले में कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगते हुए अटॉर्नी जनरल को पत्र भेजा है।
चुनाव आयोग का जवाब
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आयोग के भीतर अलग-अलग सुझाव, टिप्पणियां और सवाल उठना संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है। आयोग का कहना है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और SIR से संबंधित निर्णयों को भी तीनों आयुक्तों की मंजूरी मिली।
रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग ने यह भी कहा कि आंतरिक नोट्स और टिप्पणियों को अंतिम निर्णय से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
BJP ने विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा?
BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया में सभी आयुक्तों की भागीदारी रही है। पार्टी का कहना है कि आंतरिक स्तर पर अलग-अलग राय होना लोकतांत्रिक विचार-विमर्श का हिस्सा है और इसे आयोग में टूट या असहमति के अंतिम प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें- खाटूश्यामजी नगरपालिका में अध्यक्ष चुनाव पर हाईकोर्ट का ब्रेक, पार्षद लक्ष्मी देवी के मामले ने बढ़ाई मुश्किल
BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर लगाया आरोप
BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर राजनीतिक आरोप लगाए और कहा कि विपक्ष चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग को निशाना बना रहा है। BJP ने विपक्ष को संसद में CECके खिलाफ औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की चुनौती भी दी है ।