नई दिल्ली: शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती पर सोमवार को देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और अन्य नेताओं ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी और उनके साहस, त्याग व देशभक्ति को याद किया। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को तत्कालीन पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान के फैसलाबाद क्षेत्र में है।

PM मोदी ने बताया प्रेरणा का स्रोत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगत सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए उनके अदम्य साहस और बलिदान को याद किया। PM मोदी ने कहा कि भगत सिंह का साहस और देश के लिए सब कुछ न्योछावर करने का जज्बा आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

CM योगी ने कहा- उनका साहस हमेशा प्रेरणा देता रहेगा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगत सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने देश की आजादी को ही अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य बनाया और अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। CM योगी ने उनके साहस, त्याग और बलिदान को राष्ट्र के स्वाभिमान और गौरव की रक्षा के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

भजनलाल शर्मा ने युवा शक्ति का प्रतीक बताया

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भगत सिंह को युवा शक्ति, पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह का साहस, विचार और राष्ट्रप्रेम आज भी देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है।

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने भी दी श्रद्धांजलि

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भगत सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। दिल्ली सरकार की ओर से ‘चलो भगत सिंह के साथ’ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें पदयात्रा निकाली गई। कार्यक्रम के दौरान भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाओं का अनावरण भी किया गया।

केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक ने किया नमन

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी भगत सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। ब्रजेश पाठक ने भगत सिंह को स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाला वीर सपूत बताते हुए उन्हें नमन किया।

देशभर में हो रहे श्रद्धांजलि कार्यक्रम

भगत सिंह की जयंती पर अलग-अलग राज्यों में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दिल्ली में पदयात्रा के अलावा कई जगहों पर उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण और सभाओं का आयोजन हुआ। धनबाद के कतरास में भी श्रद्धांजलि सभा और प्रभात फेरी का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हुए।

भगत सिंह ने बेहद कम उम्र में देश के स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी अलग पहचान बनाई। 23 मार्च 1931 को राजगुरु और सुखदेव के साथ उन्हें फांसी दी गई। उनकी जयंती हर साल 28 सितंबर को देशभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है।