Jantar Mantar Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्रदर्शन स्थल पर लगी पाबंदियों को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने वालों को जेल भेजा जा रहा है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा रही है। खड़गे का यह बयान Cockroach Janata Party (CJP) के दो कार्यकर्ताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद सामने आया है।
पहले वोट की चोरी, अब विरोध के अधिकार की चोरी
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की SIR प्रक्रिया से बाहर रह गए 13.3 करोड़ लोगों को कथित तौर पर 'घुसपैठिया' बताए जाने संबंधी टिप्पणी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह का बयान भारतीयता का अपमान है। खड़गे ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले वोट के अधिकार पर सवाल उठ रहे हैं और अब लोगों के विरोध करने के अधिकार को भी सीमित किया जा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी पोस्ट में लिखा, “पहले वोट की चोरी, फिर विरोध के अधिकार की चोरी- यह बीजेपी के अधिनायकवाद का सबूत है।” उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव बंद करने की मांग भी की।
गृह मंत्री द्वारा SIR में बाहर 13.3 करोड़ भारतीयों को “घुसपैठिया” घोषित करना भारतीयता का अपमान है। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद, जंतर-मंतर को designated protest site से हटाकर… पहले वोट चोरी फिर “विरोध करने के अधिकार की चोरी” भाजपाई तानाशाही का प्रमाण है। ज्ञानेश कुमार को बचाना बंद कीजिए ! सत्ता से सवाल पूछने वालों को जेल, युवाओं को लाठी-डंडे, जबरन हिरासत हमारी बेटियों से पुलिसिया बर्बरता, RSS गुंडों को खुलेआम छूट, मोदी-शाह की दमनकारी नीतियों के आगे अब कोई नहीं झुकेगा, देश आवाज़ उठा रहा है, भाजपा से एक-एक बात का हिसाब लेकर रहेगा।
— Mallikarjun Kharge (@kharge) October 14, 2026
खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता से सवाल पूछने वालों को जेल भेजा जा रहा है, युवाओं पर लाठियां चलाई जा रही हैं और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े समूहों को कथित तौर पर खुली छूट दिए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की जनता सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाती रहेगी।
CJP के दो कार्यकर्ता पांच दिन की न्यायिक हिरासत में
यह विवाद CJP कार्यकर्ताओं अशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद बढ़ा है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को तीन कार्यकर्ताओं ने 11 अन्य लोगों के साथ निजी परिसर के रास्ते उस स्थान में कथित तौर पर प्रवेश किया, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया था। पुलिस ने उन पर ड्यूटी कर रहे कर्मियों के काम में बाधा डालने का भी आरोप लगाया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। अधिकारियों ने कार्रवाई के पीछे सार्वजनिक शांति भंग करने की कथित कोशिशों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों को उकसाने के आरोपों का भी जिक्र किया है।
तीसरे कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति और सदाचार बनाए रखने के लिए 5,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार की शर्त पर पाबंद किया गया है। हालांकि, CJP और विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए की गई है। कार्यकर्ताओं के वकील अभिष्ट हेला ने भी निवारक कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी बोले- तिरंगा फहराना अपराध नहीं
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी CJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है और ऐसा करने वाले युवाओं को जेल भेजना कायरता है। राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA गठबंधन अलग-अलग बैनर के साथ एक ही उद्देश्य से खड़े हैं- अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग करना। उन्होंने कहा, “जंतर-मंतर भारत के लोगों का है। हम इसे वापस लेकर रहेंगे।”
Waving the Tricolour at Jantar Mantar in a peaceful protest is not a crime. Jailing youth for it is an act of cowardice. Students. Youth. Journalists. The INDIA bloc. Different banners, one cause. All protests are one: citizens demanding their constitutional rights. Jantar Mantar belongs to the people of India. We will reclaim it.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 14, 2026
अभिजीत दिपके ने बताया 'अघोषित आपातकाल'
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी अशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत पर सवाल उठाए। उन्होंने इस स्थिति को 'अघोषित आपातकाल' करार देते हुए पूछा कि राष्ट्रीय ध्वज लहराने के मामले में कार्यकर्ताओं को जेल क्यों भेजा गया। दिपके ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP का आंदोलन विपक्षी दलों के विरोध से कुछ मुद्दों पर समानता रखता है, लेकिन संगठन एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में काम करता रहेगा।
Ashu and Saurav have been sent to 5 days judicial custody. Their fault? Unfurling tricolour at Jantar Mantar. Show some guts, @narendramodi. If you’re so determined to crush dissent, have the courage to officially declare an Emergency instead of hiding behind these cowardly tactics.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) October 14, 2026
संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज ने भी साधा निशाना
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बीजेपी और RSS पर तिरंगे का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को युवाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चेतावनी दी और कहा कि सरकार को युवाओं से उलझना नहीं चाहिए। वहीं, AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने भी दोनों कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत पर सवाल उठाते हुए इसे 'तानाशाही' बताया।
मोदी जी क्या आप अंग्रेज़ हैं? क्या भारत में ब्रिटिश राज है? मुझे मालूम है आप लोग तिरंगे से नफ़रत करते हैं आप लोगों ने “52 साल तक RSS के मुख्यालय पर तिरंगा नही फहराया” आपने CJP के नेता @AshutoshRanka और @SauravDassss को तिरंगा फहराने और भारत माता की जय लगाने के कारण जेल भेज दिया। युवाओं से पंगा मत लो मोदी जी ये आपकी तानाशाही का अंत जल्द करेंगे।
— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) October 14, 2026
SIR को लेकर पहले से जारी है सियासी टकराव
दरअसल, CJP और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर हुई कार्रवाई ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है। एक तरफ पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कथित अनधिकृत प्रवेश, ड्यूटी में बाधा और सार्वजनिक शांति से जुड़े आरोपों के आधार पर की गई। दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार विरोध की आवाज को दबा रही है और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।