Election Commission: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद के बीच चुनाव आयोग के हालिया प्रेस नोट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग का बयान ही यह संकेत देता है कि पहले कई प्रक्रियाओं में कमियां थीं।
मीडिया से बातचीत में कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयोग के प्रेस नोट में कहा गया है कि आगे से एजेंडा मीटिंग होगी, एजेंडा जारी होगा, मिनट्स जारी किए जाएंगे और मामलों की सुनवाई होगी। उनके मुताबिक इसका मतलब यह निकलता है कि पहले ऐसा नहीं हो रहा था।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, यह कैसी बात है? क्या भारत में दो तरह के कानून हो सकते हैं? एक Form-6 आपके लिए और दूसरा मेरे लिए?
SIR विवाद कैसे शुरू हुआ?
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया, Form-6, मतदाता सूची से नाम हटाने और डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दों पर कई बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि SIR से जुड़े सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग के मुताबिक ड्राफ्ट स्तर पर सुझाव और सवाल उठना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम निर्णय सभी की मंजूरी से ही हुए।आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी नीतिगत फैसले से जुड़ा नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।
विवाद में विपक्ष भी हमलावर
इस विवाद के बीच पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना की और आयोग की संरचना में बदलाव की बात कही। वहीं कांग्रेस, CPI, CPI(M), तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) समेत कई विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी आरोप लगाया कि मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया अधिक जवाबदेह होनी चाहिए।