नई दिल्ली: दिल्ली में गुरुवार को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) और नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलावों को लेकर सवाल उठाए।

कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए SIR को तत्काल रोकने की मांग की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके खिलाफ जांच की मांग भी की। सुरजेवाला ने दावा किया कि SIR के कारण 19 राज्यों में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां करीब 1.08 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए, जबकि 43 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। ये आंकड़े सुरजेवाला की ओर से लगाए गए आरोपों के तौर पर सामने आए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने SIR और अपने कामकाज को लेकर लगाए गए व्यापक आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

सुरजेवाला ने कहा कि लोकतंत्र की नींव हर नागरिक के मत देने के अधिकार पर टिकी है। उन्होंने Form 6 में किए गए बदलावों को लेकर भी सवाल उठाया। हाल में Form 6 के ऑनलाइन संस्करण में SIR से जुड़े अतिरिक्त सवाल शामिल किए जाने को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई थी।

सुरजेवाला का आरोप है कि Form 6 में अतिरिक्त जानकारी मांगे जाने से पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है। उन्होंने खास तौर पर Gen Z का जिक्र करते हुए कहा कि नए बदलावों से युवा मतदाताओं के नाम दर्ज होने पर असर पड़ सकता है। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाएं लागू कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था के तहत संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता नामांकन से जुड़े 16 लाख अपीलों का मुद्दा भी उठाया और इसे लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के बीच मतभेद की स्थिति बन रही है। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त है।

दिल्ली में SIR को लेकर भी विवाद जारी है। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.7 लाख नाम हटाए गए थे। जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक Form 6 और आवश्यक घोषणा पत्र के जरिए नाम शामिल कराने का दावा कर सकते हैं।

SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर 29 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में भी चर्चा होने की संभावना है।