नई दिल्ली: निर्माण और अन्य श्रमिकों के कल्याण के लिए उपकर के रूप में जमा करीब 3,000 करोड़ रुपये की राशि के कथित तौर पर इस्तेमाल नहीं होने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार,राज्य के श्रम विभाग और संबंधित बोर्ड को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि निर्माण श्रमिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने यह आदेश 1 अक्टूबर 2026 को डब्ल्यूपी (सी) 2991/2020 और संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
करीब 3,000 करोड़ की राशि पड़ी है अप्रयुक्त
कोर्ट के समक्ष बताया गया कि भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिकों के लिए बिल्डरों से उपकर के रूप में करीब 3,000 करोड़ रुपये का कोष जमा हुआ है। लेकिन संबंधित अधिकारियों, विशेष रूप से बोर्ड के अपर्याप्त कामकाज के कारण यह राशि अभी तक इस्तेमाल नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर उन निर्माण और अन्य श्रमिकों पर पड़ रहा है, जो कानून के तहत मिलने वाले लाभों के हकदार हैं।
पुराने कानून की जगह नया श्रम कानून
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संसद ने नए श्रम कानून लागू किए हैं। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 164 के तहत भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 सहित कई पुराने कानूनों को समाप्त किया गया है।
वहीं, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020 की धारा 143 के तहत भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कानून, 1996 को भी निरस्त किया गया है। नए कानूनों के तहत निर्माण श्रमिकों के हितों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था तैयार की गई है।
सरकार और बोर्ड से मांगा ताजा हलफनामा
कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य के श्रम विभाग और संबंधित बोर्ड को चार सप्ताह के भीतर नए हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। इन हलफनामों में यह जानकारी देनी होगी कि निर्माण और अन्य श्रमिकों को उपलब्ध लाभ पहुंचाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों को बताना होगा कि उपकर से जमा राशि का इस्तेमाल श्रमिकों के लाभ के लिए करने को लेकर कोई कार्ययोजना मौजूद है या नहीं। यदि ऐसी कोई योजना नहीं है, तो नए श्रम कानूनों के अनुरूप उसे तैयार कर लागू करने का निर्देश दिया गया है।
निर्माण श्रमिकों का पूरा रिकॉर्ड रखने का निर्देश
हाईकोर्ट ने निर्माण और अन्य श्रमिकों के नियोक्ताओं के पंजीकरण के दौरान नए श्रम कानूनों और नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इसमें नियोक्ता से उसके यहां काम करने वाले निर्माण श्रमिकों की सूची लेना भी शामिल है।
18 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित हलफनामे दाखिल नहीं किए गए या उनमें मामले की सुनवाई के लिए जरूरी जानकारी नहीं दी गई, तो इस निष्क्रियता को गंभीरता से लिया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को होगी और कोर्ट ने इसे ‘हाई ऑन बोर्ड’ रखने का निर्देश दिया है।