देश की पहली महिला कॉम्बैटेंट (युद्धक) बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की स्थापना 6 फरवरी 1986 को हुई थी। महिलाओं को देश की सेवा करते हुए लगभग 40 साल हो चुके हैं। 4 दशकों में यह सफर बढ़कर अब 6 महिला बटालियनों तक पहुंच गया है।

जिसमें 10,000 से अधिक महिला कर्मी शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से लेकर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और कोबरा (CoBRA) जैसी विशेष यूनिटों में महिलाएं मोर्चा संभाल रही हैं। महिला जवानों ने देश की सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अपनी अहम भूमिका निभाई है।

6 महिला बटालियन

1986 में शुरू हुआ सफर अब आगे कदम बढ़ा चुका है। CRPF के मुताबिक आज इस बल में 6 महिला बटालियन तैयार हो चुकी हैं। इन्हें देश में जरूरी स्थानों पर सुरक्षा में तैनात किया गया है। रैपिड एक्शन फोर्स की यूनिट में 4 महिला टीमें भी शामिल हैं।

जो दंगा विरोधी अभियानों और दंगा नियंत्रण अभियानों में जिम्मेदारी निभाती हैं। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में भी महिला जवानों की तैनाती की गई हैं। बस्तरिया बटालियन में शामिल महिला कर्मी भी हर मोर्चे पर सेवाएं दे चुकी हैं।

कांस्टेबल कमलेश को सम्मान

CRPF की महिला बटालियन ने अपने साहस का परिचय देकर देश के प्रति अपने बलिदान से इतिहास में खास जगह बनाई है। इसी में कांस्टेबल कमलेश का नाम भी शामिल हैं। जिन्हें साल 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले में सर्वोच्च बलिदान देने वाली कमलेश कुमारी को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया था। कांस्टेबल कमलेश बल की एकमात्र अशोक चक्र विजेता हैं।

लांस नायक राजवंती देवी का काम भी प्रशंसनीय

साल 1988 में श्रीलंका के एलीफेंट पास चेक पोस्ट पर अहम भूमिका निभाने के लिए विमला देवी को सेना मेडल और राजवंती देवी को सेना प्रमुख की तरफ से प्रशंसा मिली। कांस्टेबल बिंदु कुमरे ने साल 2001 में श्रीनगर एयरपोर्ट पर आतंकी हमले में बहादुरी के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया।

4 दशक की बेमिसाल सेवा

CRPF में महिला कर्मियों की 4 दशक की सेवा और बेमिसाल काम को 25 सितंबर 2026 को सम्मानित किया जाएगा। CRPF के महानिदेशक और CRPF परिवार कल्याण संघ की अध्यक्ष, सेवारत और पूर्व महिला कर्मियों को उनके योगदान और बलिदान के लिए सम्मानित करेंगे।