पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार, 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 2025 सत्र में भारत-पाकिस्तान तनाव का मुद्दा उठाया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारत के साथ हुए सैन्य टकराव का जिक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप को संघर्ष खत्म कराने में अहम बताया, साथ ही, शरीफ ने एक बार फिर कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का पुराना रुख संयुक्त राष्ट्र के मंच से दोहराया।
शरीफ ने कहा कि ट्रंप की पहल ने दक्षिण एशिया में बड़े स्तर पर संभावित जान-माल के नुकसान को टालने में मदद की, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की नेतृत्व क्षमता और उनके हस्तक्षेप की प्रशंसा भी की।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और भारत-पाकिस्तान तनाव का संदर्भ
भारत और पाकिस्तान के बीच 2025 में तनाव उस समय बढ़ा जब 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई। इसके बाद भारत ने 6-7 मई की दरम्यानी रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया।
इसी सैन्य टकराव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोका गया था। हालांकि, भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की गई थी।
ट्रंप की भूमिका पर शरीफ का बयान
शहबाज शरीफ ने अपने लगभग 23 मिनट लंबे संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति की भूमिका की विशेष रूप से सराहना की, उन्होंने ट्रंप को उनकी नेतृत्व क्षमता और समय पर किए गए हस्तक्षेप के लिए धन्यवाद दिया।
शरीफ ने कहा कि अमेरिका की ओर से सही समय पर उठाया गया कदम दक्षिण एशिया में बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने में मददगार रहा, उन्होंने भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न होने के लिए कश्मीर विवाद के समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
भारतीय राजनयिक की प्रतिक्रिया
शरीफ के भाषण के दौरान भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में मौजूद राजनयिक आर. श्रीनिवास की प्रतिक्रिया भी चर्चा में रही। कश्मीर और भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर पाकिस्तान के दावों के बीच उन्हें मुस्कुराते हुए देखा गया।
भारत पहले भी संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे को उठाए जाने पर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है। नई दिल्ली का कहना है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस पर उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
सिंधु जल संधि का भी उठा मुद्दा
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि का भी उल्लेख किया। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को स्थगित करने का फैसला किया था। नई दिल्ली का रुख है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद तथा आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संधि का निलंबन जारी रहेगा। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच पहले से ही तीखा मतभेद बना हुआ है।