नई दिल्ली: देश में डिजिटल हेल्थ सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत 1 सितंबर 2026 तक 97.8 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) बनाए जा चुके हैं। वहीं, 121 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड इन खातों से जोड़े गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

क्या है ABHA हेल्थ आईडी?

ABHA एक 14 अंकों की डिजिटल हेल्थ आईडी है। इसके जरिए व्यक्ति अपने मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में जोड़ और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाओं से साझा कर सकता है। इससे मरीजों को हर बार पुराने पर्चे, जांच रिपोर्ट और इलाज से जुड़े दस्तावेज साथ लेकर चलने की जरूरत कम हो सकती है।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड से डॉक्टरों को मरीज के पुराने इलाज और जांच से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान रिकॉर्ड संभालना आसान हो सकता है। हालांकि, इसका लाभ संबंधित अस्पताल और डिजिटल व्यवस्था में ABHA की सुविधा उपलब्ध होने पर निर्भर करेगा।

डेटा की सुरक्षा क्यों जरूरी?

डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड के विस्तार के साथ मरीजों की निजी जानकारी की सुरक्षा भी अहम है। ABHA से जुड़े रिकॉर्ड को साझा करने के लिए मरीज की सहमति महत्वपूर्ण है। इसलिए लोगों को अपनी हेल्थ आईडी और निजी मेडिकल जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का लक्ष्य देश में एक ऐसा डिजिटल स्वास्थ्य नेटवर्क विकसित करना है, जिससे मरीज, अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं आपस में जुड़ सकें।