आजकल देर रात तक फोन चलाना, काम का दबाव, पढ़ाई और बदलती दिनचर्या के कारण बहुत से लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते। कई लोग रोज 5-6 घंटे सोने के बावजूद इसे सामान्य मान लेते हैं और सोचते हैं कि बाद में समय मिलने पर नींद पूरी कर लेंगे। लेकिन नींद सिर्फ आराम करने का समय नहीं है। इस दौरान शरीर कई जरूरी प्रक्रियाएं करता है और दिल को भी आराम मिलता है। लंबे समय तक कम या खराब नींद का असर दिल, ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक सेहत पर पड़ सकता है।
रोज कितनी नींद जरूरी है?
ज्यादातर वयस्कों को हर रात कम से कम 7 घंटे की नींद की जरूरत होती है। कभी-कभार कम सोना अलग बात है, लेकिन लगातार नींद पूरी न होना स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हो सकता है। सिर्फ नींद की अवधि ही नहीं, उसकी गुणवत्ता और नियमितता भी महत्वपूर्ण है।
कम नींद से बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर
सोने के दौरान सामान्य तौर पर ब्लड प्रेशर कम होता है, जिससे दिल और शरीर को आराम मिलता है। खराब या बार-बार टूटने वाली नींद इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक नींद की कमी को हाई ब्लड प्रेशर के बढ़े जोखिम से जोड़ा गया है, जो आगे चलकर हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को प्रभावित कर सकता है।
नींद की क्वालिटी भी है जरूरी
7-8 घंटे बिस्तर पर रहने के बावजूद अगर रात में बार-बार नींद खुलती है, सोने में काफी समय लगता है या सुबह उठकर भी थकान रहती है, तो नींद की गुणवत्ता अच्छी नहीं मानी जा सकती। नियमित और लगातार नींद स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
खर्राटे हो सकते हैं चेतावनी
तेज खर्राटे, सोते समय सांस रुकना या बार-बार जागना स्लीप एपनिया के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
नींद सुधारने के आसान तरीके
सोने और उठने का समय तय रखें, दिन में शारीरिक गतिविधि करें और प्राकृतिक रोशनी लें। सोने से पहले मोबाइल और तेज रोशनी वाली स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें। कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें। लंबे समय से नींद की समस्या या दिनभर अत्यधिक नींद आने पर डॉक्टर से सलाह लें।
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