भारत की दवा निर्माता कंपनी ल्यूपिन लिमिटेड ने क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के इलाज के लिए एक नया इनहेलर Formoflo-G MDI लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी के मुताबिक, इस इनहेलर में तीन दवाओं का कॉम्बिनेशन दिया गया है, जिससे मरीजों को बीमारी के लंबे समय तक चलने वाले प्रबंधन में मदद मिल सकती है। इस इनहेलर को भारत के औषधि नियंत्रक महानिदेशक (DCGI) से भी मंजूरी मिल चुकी है।

एक इनहेलर में तीन दवाओं का कॉम्बिनेशन

ल्यूपिन के नए Formoflo-G MDI में ग्लाइकोपाइरोनियम ब्रोमाइड, फॉर्मोटेरोल फ्यूमरेट और फ्लूटिकासोन प्रोपियोनेट को निश्चित मात्रा में शामिल किया गया है। ये तीनों दवाएं सांस की नलियों को खोलने और फेफड़ों में सूजन को नियंत्रित करने में अलग-अलग भूमिका निभाती हैं। कंपनी के अनुसार, यह फिक्स्ड-डोज ट्रिपल कॉम्बिनेशन मीटर-डोज इनहेलर है, जिसे मध्यम से गंभीर COPD वाले मरीजों के लंबे समय तक इलाज और बीमारी के प्रबंधन के लिए विकसित किया गया है। इस तरह के कॉम्बिनेशन से कुछ मरीजों को अलग-अलग इनहेलर्स के इस्तेमाल की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इलाज में बदलाव करना मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करेगा।

भारत में 5.5 करोड़ से अधिक लोगों को COPD

क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, सीने में जकड़न और सांस फूलने जैसे लक्षण हो सकते हैं। समय के साथ इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं और मरीज की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

कंपनी की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 5.5 करोड़ से अधिक लोग COPD से प्रभावित हैं। ऐसे में इस बीमारी के इलाज के लिए नए विकल्पों की उपलब्धता मरीजों के लिए अहम हो सकती है। हालांकि, नए इनहेलर से कितने मरीजों को लाभ मिलेगा या इलाज का खर्च कितना कम होगा, यह वास्तविक उपयोग और उपलब्ध आंकड़ों से ही स्पष्ट हो सकेगा।

कैसे काम करता है Formoflo-G MDI?

इस इनहेलर में मौजूद तीन दवाएं अलग-अलग तरीकों से काम करती हैं। ग्लाइकोपाइरोनियम ब्रोमाइड और फॉर्मोटेरोल सांस की नलियों की मांसपेशियों को आराम देकर उन्हें चौड़ा करने में मदद करते हैं। वहीं, फ्लूटिकासोन प्रोपियोनेट फेफड़ों में सूजन को कम करने में सहायक है। इनका संयुक्त इस्तेमाल COPD के लक्षणों को नियंत्रित करने और लंबे समय तक बीमारी के प्रबंधन में मदद कर सकता है।

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इनहेलर इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान

इस इनहेलर का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और निर्धारित खुराक के अनुसार ही करना चाहिए। यह अचानक होने वाले गंभीर सांस के दौरे से तुरंत राहत देने वाला इनहेलर नहीं है। फ्लूटिकासोन युक्त इनहेलर का इस्तेमाल करने के बाद मुंह को पानी से अच्छी तरह कुल्ला करके पानी थूक देना चाहिए। इससे मुंह में फंगल संक्रमण और गले से जुड़ी समस्याओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।