Akanksha Dubey Death Case: भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मृतका आकांक्षा दुबे की मां मधु दुबे की अर्जी पर सुनवाई की। मधु दुबे ने मार्च 2023 में वाराणसी के एक होटल के कमरे में अपनी बेटी की मौत की जांच CBI से कराने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। मामले में जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ.अजय कुमार-II की बेंच ने सुनवाई की, जिसमें कहा कि एक्ट्रेस की मौत को आत्महत्या के बजाय होमिसाइडल बताया था, लेकिन यह दलीलें गलत थीं। कोर्ट ने सीबीआई द्वारा जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

बेंच ने क्या कहा?

बेंच ने कहा कि मृतका आकांक्षा दुबे के शव के बगैर मौत कैसे हुई या मौत की वजह के पीछे क्या कारण थे इसकी जांच नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या जांच अधिकारी की तरफ से जमा की गई पुलिस रिपोर्ट के खिलाफ कोई प्रोटेस्ट पिटीशन फाइल नहीं की गई थी। कोर्ट ने यह आदेश मधु दुबे की फाइल की गई एक क्रिमिनल मिसलेनियस रिट पिटीशन में दिया। जिसमें वाराणसी के एक पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR की जांच आगे की जांच या दोबारा जांच के लिए CBI को अपने हाथ में लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

आत्महत्या के बजाय हत्या की ओर इशारा

न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार द्वितीय की खंडपीठ ने वाराणसी के सारनाथ पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले के संबंध में अभिनेत्री की मां मधु दुबे द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने मृतक की तस्वीरों का हवाला दिया था। देते हुए तर्क दिया कि उनमें दिखाई देने वाली परिस्थितियां आत्महत्या के बजाय हत्या की ओर इशारा करती हैं।

तिवारी ने बताया कि मृतका का बायां पैर जमीन पर टिका हुआ था और वह बिस्तर पर बैठी हुई थी। उन्होंने उसकी कलाई पर लगी चोटों की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों से उसकी मृत्यु के तरीके पर सवाल उठते हैं।

मृतका के वकील ने क्या तर्क रखा

दरअसल वकील ने कहा था कि मृतक के शरीर और कपड़ों से शुक्राणु बरामद किए गए थे और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की डीएनए रिपोर्ट में अपराध में कथित तौर पर शामिल एक व्यक्ति के डीएनए भी मैच कर गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन स्टेशन हाउस ऑफिसर ने हाई कोर्ट में दायर जवाबी हलफनामे में डीएनए मिलान की जानकारी जानबूझकर छुपाई। इसमें पुलिस की मिलीभगत के संकेत का दावा किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एफआईआर में दर्ज तथ्य मृतक की मां से जबरदस्ती लिए गए थे।

घटना को हत्या बताना सही नहीं

तमाम दलीलों को देते हुए वकील ने तर्क दिया कि निष्पक्ष जांच के लिए कोर्ट इस मामले को सीबीआई को सौंप दे। इस याचिका का विरोध करते हुए, दूसरे पक्ष के वकील ने कोर्ट में भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत आरोप पत्र दायर किया है। आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है, और सक्षम मजिस्ट्रेट ने इसका संज्ञान ले लिया है। न्यायिक पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या जिला मजिस्ट्रेट के समने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की फिर से जांच की मांग करते हुए कोई आवेदन दायर किया गया था?

वकील ने स्वीकार किया कि ऐसा कोई आवेदन या विरोध याचिका दायर नहीं की गई थी। जिसके बाद कोर्ट ने चुनौती देने वाली किसी कानूनी विरोध याचिका के अभाव को देखते हुए यह तर्क दिया है कि घटना हत्या का मामला है यह आरोप निराधार है।

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