भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर SBI रिसर्च ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। बता दें, रिपोर्ट में छात्रों के लिए शिक्षा के अवसरों को अधिक पारदर्शी बनाने के साथ परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई गई है। इसके अलावा उच्च शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने और युवाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

शिक्षा के अधिकार में बदलाव का सुझाव

SBI रिसर्च ने संविधान के अनुच्छेद 21 में बदलाव पर विचार करने की सिफारिश की है, ताकि छात्रों के लिए फ्री और फेयर एजुकेशन के अवसर का अधिकार सुनिश्चित किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार इसका उद्देश्य छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में धोखाधड़ी, भेदभाव और अनुचित बाधाओं से सुरक्षा देना होना चाहिए।

NTA में कानूनी और प्रशासनिक बदलाव

रिपोर्ट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के मौजूदा ढांचे में बदलाव की सिफारिश की गई है। फिलहाल NTA एक सोसायटी के रूप में काम करती है। SBI रिसर्च ने इसे संसद के कानून के जरिए गठित संस्था बनाने का सुझाव दिया है, जिससे इसकी कानूनी जिम्मेदारियां और जवाबदेही स्पष्ट हो सकें।

चीन से सीख लेने का सुझाव

रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई 2024 तक NTA 240 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कर चुकी थी, जिनमें 5.4 करोड़ से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए। परीक्षा व्यवस्था में पेपर सुरक्षा, स्वतंत्र समीक्षा, उम्मीदवारों के लिए अपील की व्यवस्था और सार्वजनिक जवाबदेही मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। चीन की गाओकाओ परीक्षा के बड़े पैमाने पर संचालन और लॉजिस्टिक्स से भी सीख लेने का सुझाव दिया गया है।

सरकारी खर्च और शिक्षकों पर जोर

SBI रिसर्च के अनुसार कुल सरकारी खर्च में उच्च शिक्षा की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2018 के 1.6 प्रतिशत से घटकर करीब 1 प्रतिशत रह गई है। रिपोर्ट ने इसे बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत करने की सिफारिश की है।

वोकेशनल ट्रेनिंग में विस्तार

रिपोर्ट के अनुसार 2025 में 15 से 29 वर्ष के 30.7 प्रतिशत भारतीयों ने वोकेशनल ट्रेनिंग ली, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 7.1 प्रतिशत था। वृद्धि के बावजूद SBI रिसर्च ने इसे और व्यापक बनाने की जरूरत बताई है।

उच्च शिक्षा का हुआ विस्तार

वित्त वर्ष 2024 तक देश में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्टैंडअलोन संस्थानों की संख्या बढ़कर 64,756 हो गई। उच्च शिक्षा में छात्रों का नामांकन 4.5 करोड़ से अधिक पहुंच गया, जिसमें लड़कियों की हिस्सेदारी करीब आधी रही। इसी अवधि में शिक्षकों की संख्या बढ़कर 17.32 लाख हो गई। रिपोर्ट के सुझावों का व्यापक उद्देश्य उच्च शिक्षा में पहुंच, पारदर्शिता, जवाबदेही और रोजगारपरकता को मजबूत करना है।

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