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बंगाल में क्यों जरूरी है 'माछ-भात'? जानिए GDP में इसका बड़ा योगदान
पश्चिम बंगाल की पहचान सिर्फ उसकी संस्कृति, साहित्य और त्योहारों से ही नहीं बल्कि उसके खान-पान से भी गहराई से जुड़ी हुई है।
पश्चिम बंगाल की पहचान सिर्फ उसकी संस्कृति, साहित्य और त्योहारों से ही नहीं बल्कि उसके खान-पान से भी गहराई से जुड़ी हुई है। 'माछ-भात' यानी मछली और चावल यहां की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। यह केवल एक पारंपरिक व्यंजन नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था का भी एक मजबूत स्तंभ है। हालिया आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि मछली आधारित अर्थव्यवस्था बंगाल के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।
मत्स्य क्षेत्र का पश्चिम बंगाल की GSDP में बड़ा योगदान
एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2011-12 में मत्स्य क्षेत्र का पश्चिम बंगाल की GSDP में योगदान 3.3% था, जो 2022-23 में घटकर 2.1% रह गया है। हालांकि यह गिरावट दर्ज की गई है, फिर भी यह योगदान कई अन्य राज्यों से अधिक है। यह क्षेत्र न केवल उत्पादन में अहम है बल्कि रोजगार के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। 2019-20 में राज्य की लगभग 3.25% आबादी मछली पालन और उससे जुड़े व्यवसायों में शामिल थी।
2025-26 तक मछली उत्पादन 2 मिलियन टन होने आशंका
पश्चिम बंगाल मछली उत्पादन के मामले में देश के अन्य राज्यों में शामिल है। ऐसा दावा किया जा रहा कि 2025-26 तक राज्य का वार्षिक उत्पादन लगभग 2 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। खास बात यह है कि यह राज्य इनलैंड फिश प्रोडक्शन में देश में सबसे आगे है और मछली के बीज का प्रमुख सप्लायर भी है, जिसका राष्ट्रीय उत्पादन में 16% से अधिक योगदान है। यह क्षेत्र करीब 32 लाख लोगों की आजीविका का आधार बना हुआ है।
राज्य की भौगोलिक स्थिति मछली उत्पादन के लिए अनुकूल
राज्य की भौगोलिक स्थिति भी इस सेक्टर को मजबूत बनाती है। 158 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 2,500 किलोमीटर से अधिक लंबी नदियां और नहरें मछली उत्पादन के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं। इसके अलावा, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स, होलसेल और रिटेल बाजार, डिलीवरी नेटवर्क और एक्सपोर्ट सेक्टर इस इकोनॉमी को और विस्तार देते हैं।
एक्सपोर्ट के क्षेत्र बंगाल की पकड़ मजबूत
एक्सपोर्ट के क्षेत्र में भी बंगाल धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। 2020-21 में राज्य के कुल निर्यात में समुद्री उत्पादों की हिस्सेदारी 5.46% रही। हालांकि यह आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से पीछे है, लेकिन झींगा जैसे उत्पादों में बेहतर प्रोसेसिंग और निवेश से इसमें तेज वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
बंगाल में सबसे ज्यादा की जाती है मांसाहारी भोजन
खपत के मामले में भी बंगाल देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। यहां लगभग 98-99% आबादी मांसाहारी भोजन करती है और घरों के खर्च का करीब 18.9% हिस्सा मछली और मांस पर खर्च होता है। त्योहारों के दौरान भी इस मांग में कमी नहीं आती। उदाहरण के तौर पर, दुर्गा पूजा के दौरान फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर नॉन-वेज ऑर्डर्स में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जाती है।
Written By: Geeta Sharma
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