नई दिल्ली: केंद्र सरकार केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर यानी सीजीएसटी (CGST) के तहत अगले 3 से 4 महीनों में फेसलेस व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इसे शुरुआती तौर पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क को कम करना है।

तकनीक के जरिए मामलों का होगा आवंटन

प्रस्तावित व्यवस्था में मामलों को किसी स्थानीय अधिकारी से सीधे जोड़ने के बजाय तकनीक की मदद से बेतरतीब तरीके से आवंटित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण के माध्यम से मामलों को विशेषज्ञ टीमों को सौंपने की व्यवस्था की जा सकती है।

इससे सीजीएसटी की कार्यवाही में स्थानीय क्षेत्राधिकार और किसी एक अधिकारी के विवेक पर निर्भरता कम करने की दिशा में बदलाव हो सकता है।

आयकर विभाग की फेसलेस व्यवस्था से प्रेरणा

सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था काफी हद तक आयकर विभाग की फेसलेस व्यवस्था की तर्ज पर होगी। आयकर विभाग में आकलन की प्रक्रिया इस तरह संचालित की जाती है कि करदाता और कर अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत या प्रत्यक्ष संपर्क को तकनीकी रूप से संभव सीमा तक कम किया जा सके।

सरकार का कहना रहा है कि फेसलेस व्यवस्था का उद्देश्य दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

कारोबारियों को क्या होगा फायदा?

जीएसटी व्यवस्था में जांच और अन्य प्रक्रियाओं के दौरान कारोबारियों का अपने क्षेत्राधिकार वाले अधिकारियों से सीधा संपर्क होता है। प्रस्तावित फेसलेस प्रणाली में मामलों को अलग-अलग विशेषज्ञ टीमों के बीच तकनीक के जरिए बांटा जा सकता है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पायलट चरण में सीजीएसटी की किन-किन कार्यवाहियों को इस व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा और इसे कितने बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा।

जीएसटी परिषद की बैठक पर भी नजर

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, 8 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में पंजीकरण, रिफंड और रिटर्न से जुड़े प्रक्रियागत सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

इससे पहले केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) जीएसटी जांच में तकनीक और डेटा विश्लेषण का इस्तेमाल बढ़ा चुका है।

2023 में शुरू हुआ था स्वचालित रिटर्न जांच मॉड्यूल

मई 2023 में सीबीआईसी ने केंद्र द्वारा प्रशासित करदाताओं के लिए स्वचालित रिटर्न जांच मॉड्यूल शुरू किया था। इसमें डेटा विश्लेषण और प्रणाली द्वारा चिन्हित जोखिमों के आधार पर रिटर्न का चयन किया जाता है। किसी तरह की विसंगति मिलने पर उसकी जानकारी जीएसटी पोर्टल के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी जाती है।

प्रस्तावित फेसलेस व्यवस्था इससे एक कदम आगे होगी, क्योंकि इसमें सिर्फ जांच के लिए मामलों का चयन ही नहीं, बल्कि मामलों के आवंटन और निपटारे की प्रक्रिया में भी तकनीक की बड़ी भूमिका होगी।

पायलट के नतीजों से तय होगा आगे का विस्तार

सरकार की योजना फिलहाल इस व्यवस्था को पायलट आधार पर लागू करने की है। इसके बाद पायलट के अनुभव के आधार पर यह तय किया जा सकता है कि फेसलेस मॉडल को सीजीएसटी प्रशासन के अन्य हिस्सों में कितने व्यापक स्तर पर लागू किया जाए।