POK Protest: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में आवाम का गुस्सा शहबाज सरकार और आसिम मुनीर के खिलाफ लगातार बढ़ता जा रहा है। पीओके के कई इलाकों में हजारों की संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे है। बड़ी संख्या में लोग एलओसी के पास एकजुट होकर लगातार नारेबाजी कर रहे है।
दूसरी तरफ भारत के जम्मू कश्मीर ने अपनी बढ़ती सांस्कृतिक और सिनेमाई पहुंच के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। जो दोनोें में बड़ा अंतर दर्शाता है।
शहबाज शरीफ की बढ़ी मुश्किलें
PoK में मौजूदा आंदोलन की जड़ें केवल एक मुद्दे तक सीमित नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में बिजली की कीमतों, सब्सिडी वाले गेहूं की उपलब्धता, महंगाई, संसाधनों के बंटवारे और स्थानीय प्रशासन को लेकर असंतोष सामने आता रहा है। 2023 में शुरू हुआ आंदोलन 2024 में बड़े प्रदर्शनों में बदला और इसके बाद 2025-26 में भी विरोध का सिलसिला जारी रहा।
2026 के ताजा विवाद में PoK विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें भी बड़ा मुद्दा बन गईं। ये सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 के बाद पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में जाकर बसे थे। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि विधानसभा में प्रतिनिधित्व उन लोगों को मिलना चाहिए जो वर्तमान में PoK में रहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठा PoK का मुद्दा
PoK में हुए विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। जून 2026 में अल जजीरा ने इस संकट पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की और इसे क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे शासन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संसाधनों और स्थानीय स्वायत्तता से जुड़े विवादों से जोड़कर देखा।
इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में कश्मीरी प्रवासी समूहों द्वारा पाकिस्तान की PoK नीतियों और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ प्रदर्शन की रिपोर्ट भी सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की।
यह कारण है कि पाकिस्तान लगातार प्रदर्शनकारियों पर हमले कर रही है। इस हिंसक झड़प में अभी तक कई लोगों की जान चली गई है। इसके बाद भी विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
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