वॉशिंगटन: अमेरिका ने कई बड़ी आईटी कंपनियों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। जिनमें भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम विभाग ने Microsoft, Adobe, Infosys, Tata Group, Wipro, HCL, Cognizant और Capgemini जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है।

कंपनियों ने H-1B वीज़ा, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का किया दुरुपयोग

इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट और Adobe को भी इस कार्यक्रम से निलंबित कर दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इन कंपनियों ने H-1B वीज़ा और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का दुरुपयोग किया एवं अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी।

"H1-B वीज़ा प्रोग्राम का मकसद बेहतरीन लोगों को लाना

इस संदर्भ में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि, अमेरिकी कंपनियों को पहले अमेरिकी नागरिकों को रोजगार देना चाहिए। जबकि श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने कहा कि, इन कंपनियों से जुड़ी नई एवं लंबित PERM आवेदन प्रक्रियाओं पर फिलहाल कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, "H1-B वीज़ा प्रोग्राम का मकसद कंपनियों को अमेरिका के बाहर से ऐसे बेहतरीन लोगों को लाने की सुविधा देना है, जिनकी जगह अमेरिकी कर्मचारियों से भरना बिल्कुल नामुमकिन हो। लेकिन, दुर्भाग्य से, इस प्रोग्राम में धोखाधड़ी बहुत बढ़ गई है।"

रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण

अमेरिकी रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है। इस कार्यक्रम से निलंबन का अर्थ है कि प्रभावित कंपनियां फिलहाल अपने विदेशी कर्मचारियों के लिए नई PERM फाइलिंग नहीं कर पाएंगी। इस फैसले का सबसे अधिक असर भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ सकता है, क्योंकि Infosys, TCS, Wipro, HCL और अन्य भारतीय कंपनियां बड़ी संख्या में H-1B वीज़ा धारकों को अमेरिका में रोजगार देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी हो सकती है और कई कर्मचारियों के दीर्घकालिक इमिग्रेशन प्लान प्रभावित हो सकते हैं।

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