UN Reform: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में संरचनात्मक सुधारों को लेकर कहा है कि अगर सुधार को लेकर गंभीरता है तो टेक्स्ट-बेस्ड नेगोशिएशन शुरू करना होगा। उन्होंने कहा कि बिना किसी लिखित मसौदे के बातचीत सिर्फ समय गंवाने का जरिया बन जाती है।
जयशंकर ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के इतर आयोजित 'Ruptures & Ramparts: Building Bridges for a Changing World' नामक मंत्रिस्तरीय सत्र में यह बात कही। कार्यक्रम का आयोजन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, रिलायंस फाउंडेशन, UN in India और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने किया था।
UN सुधार के विरोधी सिर्फ समय गंवा रहे हैं
संयुक्त राष्ट्र में सुधार की प्रक्रिया में आ रही प्रक्रियात्मक बाधाओं का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि सुधार को लेकर निराशा बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "अगर हम सुधार को लेकर गंभीर हैं तो हमें टेक्स्ट-बेस्ड नेगोशिएशन की जरूरत है, क्योंकि टेक्स्ट के बिना बातचीत नहीं हो सकती। फिर वह नेगोशिएशन नहीं, सिर्फ समय हासिल करना है।" उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में बदलाव की मांग संस्था के खिलाफ होना नहीं है। उनके मुताबिक, जो लोग संयुक्त राष्ट्र की परवाह करते हैं, वे ही उसे मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप बदलना चाहते हैं।
बहुमत के बिना सुधार नहीं होगा
विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार केवल सर्वसम्मति के आधार पर हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकतंत्र में फैसले बहुमत और मतदान के जरिए लिए जाते हैं। जयशंकर ने कहा कि सभी देशों को अपनी राय रखने का अधिकार होना चाहिए और इसके बाद मतदान के जरिए निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि अलग-अलग देशों के विचारों को एक दस्तावेज में शामिल करना जरूरी है, ताकि लोकतांत्रिक तरीके से समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
ग्लोबल साउथ में बढ़ रहा सहयोग
जयशंकर ने ग्लोबल साउथ में हो रहे बदलावों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में आपसी सहयोग बढ़ाने और पुरानी निर्भरताओं से बाहर निकलने की इच्छा मजबूत हो रही है। उनके मुताबिक, इससे वैश्विक व्यवस्था को अधिक लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में रास्ता खुल रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पद को लेकर भी कहा कि महिला महासचिव की अवधारणा 'बॉटम-अप आइडिया' है, टॉप-डाउन नहीं।
UNSC में बदलाव की भारत की मांग
जयशंकर की यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की व्यापक मांगों के बीच आई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सुरक्षा परिषद के विस्तार की जरूरत पर जोर देते रहे हैं, ताकि परिषद मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सके।
15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वर्तमान में 5 स्थायी और 10 गैर-स्थायी सदस्य हैं। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में संरचनात्मक सुधार और विस्तार की वकालत करता रहा है। भारत 2028-29 कार्यकाल के लिए गैर-स्थायी सीट हासिल करने के लिए भी अभियान चला रहा है।