अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका के लिए अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ‘ट्रंप स्ट्रेट’ के नाम से जाना जाएगा, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक नक्शा साझा करते हुए यह जानकारी दी।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और युद्ध की स्थिति खत्म करने के लिए बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। ऐसे में नाम बदलने की घोषणा को दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव के बीच एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
होर्मुज को लेकर ईरान ने क्या प्रस्ताव दिया?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, तेहरान ने ट्रंप प्रशासन के सामने एक प्रस्ताव रखा है। इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और व्यापक स्तर पर जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से सात दिनों के भीतर वार्ता दोबारा शुरू करने की बात कही गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसलिए इससे जुड़ा कोई भी फैसला अमेरिका और ईरान के अलावा वैश्विक स्तर पर भी चिंता का विषय बन सकता है।

पहले भी नाम बदलने की बात कह चुके हैं ट्रंप
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलने की बात ट्रंप पहले भी उठा चुके हैं। अब सोशल मीडिया पर नक्शा साझा करके उन्होंने इस दावे को फिर से चर्चा में ला दिया है। ईरान की ओर से बातचीत और होर्मुज को खोलने का प्रस्ताव दिए जाने के बाद आया यह बयान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना सकता है।
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परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है विवाद की बड़ी वजह
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में ईरान का परमाणु कार्यक्रम प्रमुख मुद्दों में शामिल है। ट्रंप प्रशासन का रुख है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव भी हो चुका है।
दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनके देश को शांतिपूर्ण उद्देश्यों और नागरिक जरूरतों के लिए परमाणु कार्यक्रम जारी रखने का अधिकार होना चाहिए। यही मतभेद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशों में बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
फिलहाल, होर्मुज को लेकर ईरान के बातचीत के प्रस्ताव और ट्रंप की ताजा घोषणा के बाद यह देखना अहम होगा कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क आगे किस दिशा में बढ़ता है।