नई दिल्ली: अरब सागर में भारत एक बार फिर अपना पैर पसार रहा है जो चीन जैसे देशों को नागवार गुजरेगा। अरब सागर हिंद महासागर का वो इलाका जहां से दुनिया का बड़ा समुद्री व्यापार गुजरता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी बड़ी ताकत की मौजूदगी भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हो जाती है। अब भारतीय नौसेना ने भी अरब सागर में अपनी निगरानी और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं।
लक्षद्वीप भारत की समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। यहां नौसेना पहले से मौजूद है और आने वाले समय में सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तथा निगरानी क्षमता को और मजबूत करने की योजना पर काम हो रहा है। भारत लगातार अपने लक्षद्वीप में अपने युद्धपोत की तैनाती कर रहा है।
भारतीय नौसेना इस युद्धपोत की करेगी तैनाती
भारत लक्षद्वीप समूह में भारतीय नौसेना की तीसरी मौजूदगी स्थापित करने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। इसके तहत, 36 द्वीपों की इस श्रृंखला में सबसे छोटे बसे हुए द्वीप, बित्रा द्वीप पर INS बिट्रा स्थापित करने का प्रस्ताव है।
यह कदम कवरत्ती में INS द्वीपरक्षक और मिनिकॉय में INS जटायु की स्थापना के बाद उठाया जा रहा है, जिससे अरब सागर में भारत की समुद्री स्थिति और मजबूत होगी। साथ ही इस कदम से चीन जैसे देशों को सीधे चेतावनी मिलेगी।
चीन की मौजूदगी पर भारत की पैनी नजर
चीन लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री मौजूदगी बढ़ा रहा है। चीनी रिसर्च वेसल, पनडुब्बियां और निगरानी प्लेटफॉर्म अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में देखे गए हैं। भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अरब सागर में चीनी गतिविधियों को लेकर पारदर्शिता की चिंता जताई है।
नौसेना का कहना है कि चीन की मौजूदगी पर उसकी नजर है और भारत अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा। यानी संदेश साफ है। हिंद महासागर में जो भी गतिविधि होगी, भारत उसे नजरअंदाज नहीं करेगा।
भारत के लक्षद्वीप क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
लक्षद्वीप अरब सागर में भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए बेहद अहम लोकेशन है। यह इलाका पश्चिमी समुद्री रास्तों के करीब है और यहां से गुजरने वाले महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स पर नजर रखने में मदद मिलती है। इसी रणनीतिक महत्व को देखते हुए भारत ने मिनिकॉय में INS Jatayu नौसैनिक बेस विकसित किया है। इसका उद्देश्य पश्चिमी अरब सागर में भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल पहुंच बढ़ाना और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है।
लक्षद्वीप में पहले से INS Dweeprakshak मौजूद है, जबकि बिट्रा में भी नौसेना का नया डिटैचमेंट विकसित किया जा रहा है। नौसेना ने कहा है कि द्वीपों के संवेदनशील पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। भारतीय नौसेना के युद्धपोत अब हिंद महासागर से आगे दक्षिण चीन सागर, भूमध्यसागर और अटलांटिक तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।