India Energy Crisis: मीडिल ईस्ट में जारी संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनातनी जारी है। जिसने भारत समेत दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ा दी है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण भारत में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कमी देखी गई थी। वहीं एक बार फिर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि आने वाले महीनों में भीषण खाघ संकट गहरा सकता है।

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति बेहद चिंताजनक होती जा रही है। सबसे बड़ी बात है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर ही कच्चा तेल, एलपीजी और अन्य प्रकृतिक गैस आता है। हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि भारत को अन्य संभावित रूट पर जोड़ देना चाहिए। आईए समझते है इसके मायने।

क्या भारत में गहराने वाला है एनर्जी संकट?

मीडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण कई तरह के सवाल उठना शुरू हो गए है कि क्या आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल संकट गहरा सकता है। क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगातार यह धमकी दी जा रही है कि वह ईरान पर भीषण हमला कर सकते है। अगर ऐसा होता है तो ईरान की तरफ से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया जाएगा।

जिसके बाद कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य प्रकृतिक गैस की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो जाएगी। इसका असर यह होगा कि भारत में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दामों में बढ़ोतरी होगी। साथ ही एनर्जी संकट भी गहरा जाएगा। यही कारण है कि अब एक्सपर्ट की तरफ से भारत को दूसरे रूट तलाशने की सलाह दी जा रही है।

India Energy Crisis से इन सेक्टरों पर पड़ेगा असर

आने वाले दिनों में अगर भारत ऊर्जा सप्लाई के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो जाता है तो इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है, करंट अकाउंट पर दबाव पड़ सकता है और देश में महंगाई बढ़ सकती है। इसका असर सिफर तेल और गैस सेक्टर तक ही सीमित नहीं रहेगा। बल्कि ट्रांसपोर्टेशन, एविएशन, लॉजिस्टिक्स, पेट्रोकेमिकल्स, मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर जैसे सेक्टरों पर भी पड़ता है।

भारत इन देशों से ले सकता है मदद

बताते चले कि पहले भारत के एलपीजी इंपोर्ट में खाड़ी देशों के सप्लायर्स की हिस्सेदारी लगभग 88 प्रतिशत थी, लेकिन मीडिल ईस्ट में तनाव के बाद भारत ने सप्लाई को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव किया है। भारत ने ओमान, नाइजीरिया, त्रिनिदाद और अंगोला जैसे देशों से LNG सप्लाई के स्रोत भी बढ़ाए हैं और रिफाइनरी के लिए कच्चे तेल की ज़रूरत को पूरा करने के लिए रूस से खरीद बढ़ाई है।