नई दिल्ली: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के बीच आर्थिक सुधारों को लेकर बातचीत तेज हो गई है। पाकिस्तान सरकार ने संसद के सामने करीब 174 विधायी संशोधन रखने की तैयारी की है। ये बदलाव वित्तीय क्षेत्र, सरकारी कंपनियों, रेमिटेंस, ऊर्जा, चीनी नीति और अन्य आर्थिक क्षेत्रों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
पाकिस्तान के वित्त सचिव इमदादुल्लाह बोसल ने नेशनल असेंबली की वित्त और राजस्व संबंधी स्थायी समिति को बताया कि IMF की ओर से करीब 174 संशोधन मांगे गए हैं। सरकार इन्हें संसद के सामने मंजूरी के लिए रखेगी। हालांकि, इन प्रस्तावों को मंजूरी देना या खारिज करना पाकिस्तान की संसद का अधिकार रहेगा।
7 अरब डॉलर के IMF प्रोग्राम की चौथी समीक्षा
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब IMF पाकिस्तान के 7 अरब डॉलर के Extended Fund Facility (EFF) की चौथी समीक्षा करने वाला है। इसके साथ 1.4 अरब डॉलर के Resilience and Sustainability Facility (RSF) की तीसरी समीक्षा भी होनी है। औपचारिक बातचीत 28 सितंबर से शुरू होने वाली है।
पाकिस्तान के दोनों IMF कार्यक्रमों की कुल राशि करीब 8.4 अरब डॉलर है। वित्त सचिव के मुताबिक अब तक IMF से करीब 4.5 अरब डॉलर वितरित किए जा चुके हैं।
किन क्षेत्रों में बदलाव चाहता है IMF?
174 प्रस्तावित संशोधन कई क्षेत्रों से जुड़े हैं। इनमें प्रमुख रूप से वित्तीय क्षेत्र में गवर्नेंस, सरकारी कंपनियों (SOE) में सुधार, टैक्स और राजस्व व्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र, रेमिटेंस, Sovereign Wealth Fund, चीनी नीति, जलवायु परिवर्तन, स्थानीय मुद्रा से जुड़े प्रावधान में बदलाव शामिल हैं।
Sovereign Wealth Fund पर भी दबाव
IMF के साथ बातचीत में पाकिस्तान के Sovereign Wealth Fund (SWF) से जुड़े कानून में बदलाव भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। इस फंड में OGDCL और Pakistan State Oil समेत पांच बड़ी सरकारी कंपनियां शामिल हैं। IMF इन कंपनियों की गवर्नेंस और वित्तीय रिपोर्टिंग व्यवस्था को दूसरी सरकारी कंपनियों पर लागू मानकों के अनुरूप करने की मांग कर रहा है।
रेमिटेंस की सब्सिडी पर IMF को आपत्ति
पाकिस्तान के लिए विदेशों से आने वाला रेमिटेंस विदेशी मुद्रा का अहम स्रोत है। सरकार ने रेमिटेंस को बढ़ावा देने के लिए पहले सब्सिडी दी थी, लेकिन IMF ने ऐसी सब्सिडी का विरोध किया है। पाकिस्तान के वित्त सचिव के मुताबिक यह सब्सिडी पहले 120 अरब पाकिस्तानी रुपये से अधिक हो गई थी और बाद में इसे वापस ले लिया गया।
चीनी नीति में भी बदलाव की तैयारी
IMF समीक्षा के तहत पाकिस्तान की चीनी नीति भी चर्चा में है। संघीय सरकार ने चीनी क्षेत्र को उदार बनाने के लिए एक ड्राफ्ट नीति तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक तीन प्रांत इस नीति पर सहमत हैं, जबकि एक प्रांत ने आपत्ति जताई है।
बिजली कंपनियों को लेकर भी सवाल
पाकिस्तान की घाटे में चल रही बिजली वितरण कंपनियां (DISCOs) भी IMF कार्यक्रम में चर्चा का विषय हैं। नेशनल असेंबली की समिति में इस बात पर सवाल उठाया गया कि अगर लाभ वाली बिजली कंपनियों का निजीकरण किया जाता है तो घाटे में चलने वाली कंपनियों का भविष्य क्या होगा।
समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि आर्थिक सुधार केवल IMF की शर्तें पूरी करने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उनके असर को आम लोगों, कारोबार और अर्थव्यवस्था पर भी परखा जाना चाहिए।
संसद की मंजूरी जरूरी
पाकिस्तान सरकार ने स्पष्ट किया है कि IMF से चर्चा के तहत तैयार किए जा रहे विधायी बदलाव संसद के सामने रखे जाएंगे। अंतिम मंजूरी पाकिस्तान की संसद को ही देनी होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इन 174 संशोधनों पर संसद में होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण होगी।