Dr S Jaishankar: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर न्यूयॉर्क (USA) में 81वीं यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA 81) में पहुंचे जहां उन्होंने पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज़्म समिट के पहले इवेंट को संबोधित किया। इस दौरान विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने मोल्दोवा के विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक संबंधों को मजबूत करने में हुई प्रगति पर ध्यान दिया। साथ ही चल रहे यूक्रेन संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
भारत को-स्पॉन्सर के तौर पर शामिल होकर हुई खुशी
एस.जय शंकर ने पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज़्म समिट के पहले इवेंट को संबोधित करते समय समिट में शामिल होने की खुशी जताई। एस. जय शंखर बोले मैं प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा को यह पहल करने के लिए धन्यवाद देता हूं। भारत को-स्पॉन्सर के तौर पर शामिल होकर खुश है। हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब ग्लोबल ऑर्डर पर दबाव है।
कुछ दशकों से, दुनिया में लगातार रीबैलेंसिंग देखी गई है। हालांकि, बहुत ज़्यादा कॉम्पिटिशन, जियोपॉलिटिकल टेंशन और असल झगड़ों ने अलग दे दिया है। अगर इसे ऐसे ही छोड़ दिया तो यह इंटरनेशनल को-ऑपरेशन की भावना पर सवाल खड़ा होगा। इसीलिए यह बेहद ज़रूरी है कि इस समय मल्टीलेटरलिज़्म मज़बूती से अपनी बात रखे।
क्लाइमेट एक्शन और क्लाइमेट जस्टिस से होगी इंटरनेशनल सिक्योरिटी
उन्होंने कहा कि- यहां दांव पर असली मुद्दे हैं, सिर्फ़ बातें नहीं। शांति और इंटरनेशनल सिक्योरिटी का भविष्य, क्लाइमेट एक्शन और क्लाइमेट जस्टिस का, नई टेक्नोलॉजी और डेवलपमेंट फाइनेंस का, आतंकवाद का मुकाबला करने और सप्लाई चेन को मज़बूत करने का, और आपदा से निपटने की क्षमता पक्का करने और महामारी के लिए तैयारी करने का।
यह सब सहयोग करने की इच्छा पर निर्भर करता है। हमने जो भी कुछ हासिल किया वह सिर्फ़ मिलकर किए गए प्रयासों से है। यहां सबक यह है कि बेहतर के लिए कोशिश करते हुए अच्छे की रक्षा करें। यह मकसद कई तरह के प्रयासों, पहलों के कॉम्बिनेशन से हासिल किया जा सकता है।
डी-रिस्किंग और डाइवर्सिफ़ाइंग को बढ़वा देने पर जोर
जहां चल रहे झगड़ों की बात है, तो बड़ी शांति के लिए कोशिश करते हुए भी खास पहलुओं पर ध्यान दिया जा सकता है। फ्यूल, खाना, फर्टिलाइज़र और फाइनेंस के 4F संकट को ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता। जब नई क्षमताएं और चिंताएं पैदा होती हैं, तो फ्रेमवर्क और गार्डरेल के लिए एक बहुत मज़बूत मामला होता है। जहां रुकावटों, दबदबे और रुकावट का खतरा हो, वहां डी-रिस्किंग और डाइवर्सिफ़ाइंग को बढ़ावा देना चाहिए। और जहां कोई मज़बूत वजह या मज़बूत मामला हो, वहां एक जैसी सोच वाले लोगों में एक साथ आने का कॉन्फिडेंस होना चाहिए।
मल्टीलेटरलिज़्म है ज़रूरी
मल्टीलेटरलिज़्म तभी सबसे अच्छा होगा जब इंटरनेशनल कानून, नियमों और नियमों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। मल्टीलेटरलिज़्म को आगे बढ़ने के लिए, इसकी वकालत और इसके इस्तेमाल दोनों को मज़बूत करना होगा। इसलिए, सुधार वाला मल्टीलेटरलिज़्म ज़रूरी है। ज़्यादा भागीदारी वाली बातचीत और ज़्यादा ट्रांसपेरेंट फ़ैसले लेने की ज़रूरत है। इससे वह उम्मीद और आशावाद मिलेगा जिसकी UN सिस्टम को साफ़ तौर पर ज़रूरत है। और यह साथ मिलकर काम करने के हमारे इरादे को और मज़बूत करेगा।
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