El Nino: दुनियाभर में एक बार फिर अल नीनो की चर्चाएं शुरू हो गई है। दुनिया के बड़े मौसम विशेषज्ञों ने एक ऐसी चेतावनी दी है, जिससे मानव के लिए एक खतरा पैदा हो सकता है। जानकारी के मुताबिक El Nino एक ऐसी स्थिति में पहुंच रहा है जो पहले कभी नहीं देखी गई।

यूएन ने कहा है कि इस साल का यह मौसमी घटनाक्रम कम से कम 1950 के बाद से देखे गए सबसे मज़बूत अल नीनो में से एक हो सकता है। अब सवाल उठना शुरू हो गया है कि क्या दिसंबर में गर्मी का प्रकोप दिखने वाला है? आईए समझते है मौसम विशेषज्ञों की क्या है चेतावनी?

दुनिया के मौसम पर क्या पड़ेगा असर?

El Niño का सबसे बड़ा असर यह होता है कि यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के सामान्य पैटर्न को बदल सकता है। कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ सकता है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है। यानी इसका असर हर जगह एक जैसा नहीं होगा।

मौसम विभाग के मुताबिक अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर में अल नीनो सुपर एक्टिव होने जा रहे है, जिसके बाद अब सवाल है कि क्या भारत में जहां दिसंबर में अच्छी खासी ठंड पड़ती है, वहां गर्मी का प्रकोप देखने को मिल सकता है। नई चेतावनी के बाद मौसम एक्सपर्ट अलग तरह की चेतावनी दे रहे है।

क्या दिसंबर में पड़ेगी भयंकर गर्मी?

अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी जलवायु घटना है। समुद्र के तापमान में यह बदलाव हवा के दबाव, जेट स्ट्रीम और बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि इसका असर केवल प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है।

अमेरिकी एनओएए के सितंबर के आकलन में पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से 3°C से ज्यादा ऊपर पहुंच चुका था। एजेंसी ने अनुमान लगाया था कि El Niño साल के अंत तक और मजबूत हो सकता है। मौसम वैज्ञानिक रयान माउ ने पूरी दुनिया का एक क्लाइमेट मैप पोस्ट किया और कहा कि पृथ्वी लगभग पूरी तरह से लाल रंग में दिख रही है। जिसने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।

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