Yamuna Expressway Bus Accident: यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे दिया। दिल्ली से महोबा जा रही बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत हो गई। हादसे में महोबा के देवेंद्र भारद्वाज की भी जान चली गई। वह अपनी पत्नी रेखा के साथ अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महोबा जा रहे थे।
देवेंद्र की मौत के बाद उनके बेटे सर्वज्ञ का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्हें इस बात का मलाल है कि माता-पिता को ट्रेन से भेजने की बजाय उन्होंने खुद ऑनलाइन एसी बस का टिकट बुक किया था। उन्हें क्या पता था कि जिस सफर को उन्होंने माता-पिता की सुविधा के लिए चुना, वही उनके पिता का आखिरी सफर बन जाएगा।
ट्रेन की जगह बेटे ने बुक की थी बस की टिकट
मूलरूप से महोबा के रहने वाले सर्वज्ञ हरियाणा के रोहतक में व्यवसाय करते हैं। उनके माता-पिता देवेंद्र भारद्वाज और रेखा उनसे मिलने रोहतक आए थे। बुधवार को दोनों को महोबा लौटना था। सर्वज्ञ के मुताबिक, माता-पिता को ट्रेन से महोबा जाना था, लेकिन उन्होंने उनकी सुविधा को देखते हुए ऑनलाइन एसी बस की टिकट बुक कर दी। रात करीब 10:30 बजे उन्होंने अपनी मां से फोन पर बात की।
उस समय बस दिल्ली से निकल चुकी थी। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे जब सर्वज्ञ ने मां को फोन किया तो फोन बंद मिला। उन्होंने बस के ड्राइवर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका फोन भी बंद था। काफी देर तक जानकारी नहीं मिली। बाद में ट्रैवल एजेंसी के टोल फ्री नंबर से पता चला कि जिस बस में उनके माता-पिता सफर कर रहे थे, उसमें आग लग गई है।
अस्पताल पहुंचे तो मां ने कहा- 'बेटा, तुम्हारे पिता नहीं मिल रहे'
घटना की जानकारी मिलते ही सर्वज्ञ अपने दोस्त के साथ जेवर के उस अस्पताल पहुंचे, जहां उनकी मां रेखा भर्ती थीं। सर्वज्ञ के मुताबिक, मां ने उनसे कहा कि 'बेटा, तुम्हारे पिता नहीं मिल रहे हैं, उन्हें ढूंढ लाओ।' उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मदद मांगी। बाद में उन्हें बताया गया कि उनके पिता की हादसे में मौत हो गई है। सर्वज्ञ ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि माता-पिता ट्रेन से जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने सुविधा के लिए बस में टिकट कराया था। उन्हें नहीं मालूम था कि यही सफर उनके पिता का आखिरी सफर बन जाएगा।
'मुझे दो लाख नहीं, मेरे पिता चाहिए'
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मृतकों के आश्रित परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। जब सर्वज्ञ को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने कहा कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, 'मुझे दो लाख रुपये नहीं चाहिए। मैं चार लाख रुपये देने को तैयार हूं, लेकिन मुझे मेरे पिता वापस लौटा दो।' सर्वज्ञ के मुताबिक, उनकी दादी का निधन हुआ था और उनके पिता अपनी मां को अंतिम विदाई देने के लिए महोबा जा रहे थे। एक तरफ मां के निधन का दुख था और दूसरी तरफ रास्ते में पिता की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया।
बस संचालन और व्यवस्था पर भी सवाल
सर्वज्ञ ने बस के संचालन और ट्रैवल एजेंसी की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बस पर पहले से कई चालान होने के बावजूद उसका संचालन जारी था। परिवार का यह भी आरोप है कि हादसे के बाद ट्रैवल कंपनी की ओर से उन्हें समय पर सही जानकारी और जरूरी सहयोग नहीं मिला। यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए इस हादसे में 9 लोगों की मौत हुई है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए बस के चालक और परिचालक समेत लोगों को गिरफ्तार किया है। हादसे की जांच जारी है।