लखनऊ: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सहारनपुर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय परिसर में स्थित मस्जिद को गिराए जाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग धार्मिक स्थलों को गिराते हैं और दूसरे धर्मों की आस्था का सम्मान नहीं करते, वे कभी सच्चे सनातनी नहीं हो सकते।

शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा, “जो दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते, वे कभी सनातनी नहीं हो सकते। जो दूसरों की आस्था से खिलवाड़ करते हैं, वे सनातनी नहीं हो सकते। सच्चा हिंदू कभी दूसरे धर्म की आस्था का अनादर नहीं कर सकता।”

उन्होंने कहा कि उन्हें सनातन धर्म से यही शिक्षा मिली है। यादव ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका अर्थ है कि पूरा समाज और पूरी धरती एक परिवार है। ऐसे में कोई सच्चा सनातनी या हिंदू दूसरे धर्म की आस्था से खिलवाड़ नहीं कर सकता।

अखिलेश ने सरकार पर लगाया सांप्रदायिक रंग देने का आरोप

सपा प्रमुख ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया।

यादव ने कहा कि पत्रकारों को किसी भी मामले को तोड़-मरोड़कर पेश नहीं करना चाहिए और दावा किया कि सच्चा सनातनी वह है जो सद्भाव और भाईचारे में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी समाज में सौहार्द बनाए रखना है।

राम मंदिर से जुड़े चंदे का भी उठाया मुद्दा

अखिलेश यादव ने मस्जिद गिराए जाने की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस मामले को सांप्रदायिक मुद्दा बना रही है। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े चंदे और कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी जिक्र किया।

यादव ने आरोप लगाया कि जांच और SIT की कार्रवाई में कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं और भाजपा लोगों का ध्यान दूसरी ओर ले जाने के लिए इस मामले को सांप्रदायिक रंग दे रही है।

उन्होंने सवाल किया कि मामले में हाई कोर्ट से न्याय की कोशिश क्यों नहीं की गई और सुप्रीम कोर्ट में अपील का रास्ता क्यों नहीं अपनाया गया। यादव ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने ऐसा माहौल बनाया, जिससे आगे की कानूनी कार्रवाई का अवसर सीमित हो गया।

इकरा हसन के कथित हाउस अरेस्ट पर भी सवाल

सपा सांसद इकरा हसन के सहारनपुर जाने से पहले कथित हाउस अरेस्ट का मुद्दा उठाते हुए भी अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सच्चा सनातनी कभी दूसरे धर्म को नुकसान नहीं पहुंचाएगा और न ही किसी की आस्था से खिलवाड़ करेगा।

इकरा हसन ने आरोप लगाया था कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका गया और हाई कोर्ट का रुख करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उन्होंने मस्जिद गिराए जाने को बेहद शर्मनाक बताते हुए मामले को कानूनी तौर पर चुनौती देने की बात कही थी।

अदालत के आदेश के बाद गिराई गई मस्जिद

यह विवाद उस समय सामने आया जब सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को शनिवार तड़के अदालत के आदेश के बाद ध्वस्त कर दिया गया। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने मस्जिद कमेटी की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के पहले के आदेश को बरकरार रखा था।

सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 17 जुलाई को कथित अतिक्रमण और सरकारी जमीन के दुरुपयोग के मामले में ढांचे को गिराने का आदेश दिया था। साथ ही करीब 6.41 करोड़ रुपये के मुआवजे का आदेश भी दिया गया था।

मस्जिद को अदालत के आदेश के तहत हटाया गया

सहारनपुर के DIG अभिषेक सिंह ने कहा कि मस्जिद को अदालत के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया गया है। उन्होंने बताया कि संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त PAC और RAF बल तैनात किया गया है। अफवाहों को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी मस्जिद गिराए जाने का विरोध किया है। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद वर्ष 1911 से पहले से मौजूद थी और आरोप लगाया कि मामले की कार्यवाही में वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाया गया।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर चुनाव नहीं जीते जा सकते। उन्होंने सरकार को ऐसी राजनीति से बचने की चेतावनी दी।

यह भी पढ़ें:  त्रिपुरा में नाकाबंदी के दौरान बवाल: बीमार मरीज को रास्ता देने को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प