सुपौल: कोशी की 2008 की राष्ट्रीय आपदा के दौरान बाढ़ पीड़ितों की सेवा करते हुए शहीद हुए युवा चिकित्सक डॉ. चंद्रकांत पाटिल की स्मृति में सोमवार को डॉ. चंद्रकांत पाटिल स्मृति समिति के तत्वावधान में कटैया (22 आरडी) चौक पर पहली बार स्मृति दिवस समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पत्रकारों, संस्कृतिकर्मियों और युवाओं ने भाग लेकर महाराष्ट्र से आये उस युवा डॉक्टर को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसने कोशी के असहाय लोगों का जीवन बचाने के प्रयास में अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
समारोह का आकर्षण कोशी की लोक गायिका उषा ठाकुर और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत कबीर गायन रहा। उषा ठाकुर ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति में कबीर के अमर निर्गुण पदों -'कौन ठगवा नगरिया लूटल हो', 'सैंयां निकसि गये मैं न लड़ी थी', 'अबहीं उमर मोरी बारी रे, देखो आई गवनवां की सारी', 'झीनी-झीनी बीनी चदरिया', 'नैहरवा हमका न भावै', 'अवधूता युगन-युगन हम योगी' तथा 'जरा धीरे गाड़ी हांको मेरे राम गाड़ी वाले' - का गायन किया।
इन प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को गहरे मानवीय संवेदनाओं से भर दिया और श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके साथ तबले पर अर्जुन कुमार तथा पैड पर कालेश्वर जी ने प्रभावशाली संगति की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय समाजसेवी एवं लोकगायक जगदीश भिंडवार ने की। प्रारंभ में डॉ. चंद्रकांत पाटिल के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
'यह केवल एक डॉक्टर की नहीं, इंसानियत की कहानी है'
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार पुष्पराज ने कहा कि महाराष्ट्र के धुले जिले के एक कपड़ा मिल मजदूर के पुत्र डॉ. चंद्रकांत पाटिल ने एमबीबीएस परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया था और मुंबई में एमडी की पढ़ाई कर रहे थे। कोशी की भीषण त्रासदी की सूचना मिलते ही वे अपने साथियों के साथ राहत कार्य के लिये बिहार पहुंचे।
डॉ. पाटिल के पिता उमाकांत पाटिल ने उन्हें बताया कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने स्वयं उन्हें फोन कर आश्वस्त किया था कि उनके पुत्र को बिहार का सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुशील मोदी अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्हीं की सरकार आज भी बिहार में कायम है इसलिए इस सरकार को इस शहादत को विस्मृत नहीं होने देना चाहिए और डॉ. पाटिल की स्मृति को सम्मान देने की दिशा में सुनिश्चित करना चाहिए ।
'डॉ. पाटिल की शहादत घृणा की राजनीति के मुंह पर करारा तमाचा है'
वरिष्ठ पत्रकार, संस्कृतिकर्मी एवं कोशी पानी पंचायत के जिला संयोजक राजेश चन्द्र ने कहा कि डॉ. चंद्रकांत पाटिल की मृत्यु भले एक दुर्घटना थी, लेकिन कोशी के पीड़ित लोगों के बीच आने का उनका निर्णय किसी दुर्घटना का परिणाम नहीं था। यह एक जागरूक, मानवीय और नैतिक निर्णय था।
उन्होंने कहा कि गांधी, नेहरू, भगत सिंह, अशफाक उल्ला खां, मौलाना आजाद, खान अब्दुल गफ्फार खां और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसी विभूतियों की विरासत ने ही ऐसे नौजवानों को जन्म दिया, जो जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानियत को चुनते हैं।
उन्होंने कहा कि आज जब समाज में विभाजन और घृणा की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है, तब डॉ. चंद्रकांत पाटिल की शहादत हमें याद दिलाती है कि भारत की आत्मा साझी संस्कृति, करुणा और मानवीय एकजुटता में बसती है। उनकी स्मृति को याद करना नफरत की राजनीति के मुंह पर एक करारा तमाचा है।
कोशी के संघर्ष और सेवा की परंपरा का प्रतीक
कोशी नवनिर्माण मंच के संयोजक महेंद्र यादव ने कहा कि डॉ. चंद्रकांत पाटिल का बलिदान कोशी के लोगों को संघर्ष और सेवा के लिये हमेशा प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि डॉक्टर पाटिल की श्रद्धांजलि में कुसहा त्रासदी में जान गंवाने वाले 493 लोगों और लापता हुए हजारों लोगों की श्रद्धांजलि शामिल है।
दीनबंधी पंचायत के पूर्व सरपंच अफजल हुसैन ने कहा कि गरीब परिवार के बेटे का डॉक्टर बनना बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह थी कि वह डॉक्टर अपनी सुविधा और भविष्य छोड़कर कोशी के असहाय लोगों की सेवा करने चला आया।
लोगों ने रखे अपने विचार
साहित्यसेवी -प्रकाशक दीपक दिनकर ने डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल की शहादत के महत्व पर अपनी बात रखते हुए इस अवसर पर अपने प्रकाशन की तरफ से डॉ. चंद्रकांत पाटिल स्मृति समिति की स्मारिका प्रकाशित करने की घोषणा भी की।
भीमनगर के शिक्षक एवं समाजसेवी चन्द्रशेखर प्रसाद कर्ण, कटैया 22 आरडी के प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय कुमार ठाकुर, समारोह के अध्यक्ष जगदीश भिंडवार तथा सामाजिक कार्यकर्ता सुमित यादव ने भी डॉ. पाटिल के जीवन और सेवा भावना पर अपने विचार रखे।
लोकगायक जगदीश भिंडवार ने 'पहिया चलता है, समय का पहिया चलता है' गीत गाकर शहीद डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल को श्रद्धांजलि दी। कटैया 22 आरडी आरडी के प्राथमिक विद्यालय के आजाद, सुंदर, वाटसन, मोनू आदि बच्चों ने देशभक्ति गीत 'हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं' की प्रभावी सामूहिक प्रस्तुति की।
स्मृति समिति की पहल को मिला स्थानीय सहयोग
वक्ताओं ने बताया कि डॉ. चंद्रकांत पाटिल स्मृति समिति का गठन इस उद्देश्य से किया गया है कि कोशी क्षेत्र में डॉ. पाटिल की शहादत और मानवीय विरासत को संरक्षित किया जा सके तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस अभियान को आगे बढ़ाने और शहादत की विरासत के संरक्षण में सहयोग का भरोसा दिया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि डॉ. चंद्रकांत पाटिल की स्मृति को कोशी की सामूहिक चेतना का हिस्सा बनाया जायेगा और मानवता, सेवा तथा सामाजिक एकजुटता के मूल्यों को आगे बढ़ाया जायेगा।