Ken-Betwa Link Project: मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए राहत की खबर है। जिन ग्रामीणों के पास उम्र साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उनकी उम्र Bone Density Test और X-Ray के जरिए निर्धारित की जाएगी। इसके आधार पर पात्र लोगों को मुआवजा और पुनर्वास पैकेज का लाभ दिया जाएगा।
180 लोगों की हो चुकी है जांच
छतरपुर जिला पंचायत के CEO नमः शिवाय अर्जारिया ने बताया कि प्रशासन यह प्रक्रिया इसलिए चला रहा है, ताकि कोई भी पात्र लाभार्थी मुआवजे या पुनर्वास पैकेज से वंचित न रह जाए। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 180 लोगों की Bone Density या X-Ray जांच कराई जा चुकी है। अगर इसी तरह के और मामले सामने आते हैं तो जांच की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
स्कूल नहीं गए लोगों के सामने आई उम्र तय करने की समस्या
अधिकारी के मुताबिक, प्रभावित आदिवासी और अन्य समुदायों के कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्होंने कभी स्कूल में पढ़ाई नहीं की। ऐसे लोगों के पास जन्मतिथि या उम्र साबित करने वाले दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इस वजह से मुआवजा और पुनर्वास की पात्रता तय करने में समस्या आ रही थी। इसी को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जिला अस्पताल में Bone Density Test कराया जा रहा है।
18 साल की उम्र का है नियम
परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे के दो वर्ग हैं, निजी भूमि और सरकारी भूमि। आवास के प्रकार के आधार पर एक निश्चित कट-ऑफ डेट लागू होती है। पात्रता के लिए परिवार के संबंधित सदस्य की उस कट-ऑफ तारीख तक उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। ऐसे में जिन लोगों के पास उम्र से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं, उनके लिए मेडिकल जांच के जरिए उम्र का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इसका मकसद पात्र लाभार्थियों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से बचाना और उन्हें उनका हक दिलाना है।
अप्रैल में 11 दिन चला था विरोध प्रदर्शन
केन-बेतवा लिंक परियोजना और रुंझ-मझगुवां बांध से प्रभावित आदिवासी परिवार पहले भी विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। अप्रैल में प्रभावित परिवारों ने करीब 11 दिनों तक प्रदर्शन किया था। इस दौरान सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने 'पंचतत्व आंदोलन' के तहत सामूहिक प्रदर्शन कर परियोजना को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
क्या है Ken-Betwa Link Project?
केन-बेतवा लिंक नेशनल प्रोजेक्ट केंद्र और राज्य सरकारों की महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना है। इसके तहत मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचा और 2.13 किलोमीटर लंबा दौधन बांध बनाया जा रहा है। परियोजना के तहत बांध से बेतवा नदी तक करीब 221 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के जरिए केन नदी के अतिरिक्त पानी को पहुंचाने की योजना है। इसके अलावा केन नदी पर दो सुरंगें भी बनाई जानी हैं, जिनकी लंबाई करीब 1.9 किलोमीटर और 1.1 किलोमीटर होगी।
10 जिलों के 2,000 गांवों को सिंचाई का लाभ
परियोजना के तहत Pressurised Micro-Irrigation System के जरिए करीब 8.11 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य है। इससे मध्य प्रदेश के 10 जिलों के करीब 2,000 गांवों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक, करीब 7 लाख किसान परिवार इस परियोजना से लाभान्वित होंगे।
MP और UP को मिलेगा पीने का पानी
सरकार के अनुसार परियोजना से मध्य प्रदेश में करीब 44 लाख लोगों और उत्तर प्रदेश में करीब 21 लाख लोगों को पेयजल सुविधा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा परियोजना से 103 MW Hydropower और 27 MW Solar Energy उत्पादन का भी प्रावधान है। इसका पूरा लाभ मध्य प्रदेश को मिलने की बात कही गई है।
बुंदेलखंड में पानी और पलायन की समस्या पर फोकस
केन-बेतवा परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की समस्या को दूर करना और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। सरकार का दावा है कि सिंचाई सुविधाएं बढ़ने से फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परियोजना के तहत चंदेलकालीन ऐतिहासिक तालाबों के संरक्षण पर भी काम किया जाएगा। छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में 42 तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना है, जिससे बारिश के पानी का भंडारण बढ़ेगा और भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी।
सरकार का कहना है कि बेहतर सिंचाई और रोजगार के स्थानीय अवसर बढ़ने से बुंदेलखंड से होने वाले पलायन को भी कम करने में मदद मिल सकती है।