Namo Bharat Train: दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को ग्रीन एनर्जी से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर की बिजली जरूरत का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में बड़ा सोलर प्लांट विकसित किया जाएगा। परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और इसे 2028 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

जालौन में बनेगा सोलर प्लांट
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के लिए सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जालौन में सोलर प्लांट विकसित किया जाएगा। इस परियोजना को एनआईआरएल एनसीआरटीसी रिन्यूएबल्स लिमिटेड विकसित करेगा। प्लांट से पैदा होने वाली बिजली ग्रिड के माध्यम से गाजियाबाद और दिल्ली में एनसीआरटीसी के रिसीविंग सब-स्टेशन तक पहुंचाई जाएगी। इसके बाद इसी बिजली को नमो भारत कॉरिडोर में वितरित किया जाएगा। एनसीआरटीसी के मुताबिक, परियोजना को करीब ढाई साल में पूरा करने की योजना है।

कॉरिडोर की करीब 60% बिजली जरूरत सौर ऊर्जा से
सोलर प्लांट के शुरू होने के बाद दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की बिजली आवश्यकता का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा होने का अनुमान है। फिलहाल सौर ऊर्जा का इस्तेमाल डिपो, स्टेशनों और कॉरिडोर से जुड़ी सुविधाओं में किया जा रहा है। भविष्य में नमो भारत ट्रेनों के संचालन के लिए भी सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की दिशा में काम किया जा रहा है। एनसीआरटीसी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पुनीत वत्स के मुताबिक, जालौन का सोलर प्लांट 2028 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद इससे मिलने वाली सौर ऊर्जा का इस्तेमाल शुरू किया जाएगा।

दुहाई डिपो में शुरू हुआ 'सोलर ऑन ट्रैक' पायलट
एनसीआरटीसी ने सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए 'सोलर ऑन ट्रैक' नाम से पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया है। यह योजना दुहाई स्थित नमो भारत डिपो में शुरू की गई है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पिट व्हील ट्रैक के करीब 70 मीटर लंबे हिस्से पर 550 वॉट पीक क्षमता वाले 28 सोलर पैनल लगाए गए हैं। इनकी कुल क्षमता 15.4 किलोवाट पीक है। अनुमान के मुताबिक, यह संयंत्र सालाना करीब 17,500 किलोवाट-घंटे बिजली पैदा कर सकता है।

भविष्य में सीधे ट्रेन चलाने की भी तैयारी
नमो भारत ट्रेनों को सौर ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। हालांकि, इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू होने में अभी समय लग सकता है। मौजूदा योजना के तहत पहले कॉरिडोर की विभिन्न सुविधाओं की बिजली जरूरत में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाई जा रही है।

10 स्टेशनों पर पहले से लगे हैं रूफटॉप सोलर प्लांट
दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के नमो भारत और मेरठ मेट्रो स्टेशनों पर भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा रहा है। वर्तमान में 10 स्टेशनों पर रूफटॉप सोलर पावर प्लांट लगाए जा चुके हैं। इनमें साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई, दुहाई डिपो, मुरादनगर, मोदीनगर नॉर्थ, मोदीनगर साउथ, शताब्दी नगर, मेरठ साउथ शामिल हैं। इसके अलावा छह अन्य स्टेशनों पर भी रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं।

दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर कितने स्टेशन?
सराय काले खां, न्यू अशोक नगर, आनंद विहार, साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई, दुहाई डिपो, मुरादनगर, मोदीनगर साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मेरठ साउथ, शताब्दी नगर, बेगमपुल, मोदीपुरम और मोदीपुरम डिपो। नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) को हाई-स्पीड कम्यूटर ट्रांजिट सेवा के तौर पर विकसित किया गया है। ट्रेनें अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति के साथ यात्रियों को तेज और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई हैं।

ग्रीन एनर्जी की ओर बड़ा कदम
जालौन में प्रस्तावित सोलर प्लांट, स्टेशनों पर रूफटॉप सोलर और दुहाई डिपो में 'सोलर ऑन ट्रैक' पायलट परियोजना के जरिए एनसीआरटीसी नमो भारत नेटवर्क में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे भविष्य में कॉरिडोर की पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।