प्रयागराज: प्रयागराज से मुंबई जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में शामिल प्रयागराज-मुंबई रूट की क्षमता बढ़ाने के लिए मानिकपुर-इरादतगंज तीसरी रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। करीब ₹1,640 करोड़ की लागत से बनने वाली लगभग 84 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन से ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और संचालन को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी। रेलवे की योजना इस परियोजना को कुंभ 2031 से पहले पूरा करने की है। इससे प्रयागराज आने वाली नियमित और मेला स्पेशल ट्रेनों के संचालन का दबाव कम होगा। साथ ही औद्योगिक और कृषि माल की ढुलाई को भी गति मिलने की उम्मीद है।
प्रयागराज-मुंबई रूट का बड़ा बॉटलनेक होगा खत्म
प्रयागराज/छिवकी से इरादतगंज, शंकरगढ़, मानिकपुर, सतना, कटनी, जबलपुर, इटारसी और भुसावल होते हुए मुंबई तक जाने वाला रेलखंड बेहद व्यस्त है। मौजूदा ट्रैक क्षमता पर भारी दबाव है, जिसके कारण कई बार यात्री ट्रेनों को आउटर या छोटे स्टेशनों पर रोकना पड़ता है। तीसरी लाइन बनने के बाद इस कॉरिडोर की क्षमता बढ़ेगी। इससे ट्रेनों को अधिक आसानी से संचालित किया जा सकेगा और भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
कुंभ 2031 से पहले पूरा करने का लक्ष्य
वर्ष 2031 में प्रयागराज में कुंभ मेले का आयोजन होना है। इस दौरान देशभर से करोड़ों श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने की संभावना है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत से आने वाली ट्रेनों पर भी दबाव बढ़ेगा। ऐसे में मानिकपुर-इरादतगंज तीसरी लाइन को रेलवे के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। लक्ष्य है कि निर्माण कार्य वर्ष 2030 तक पूरा कर लिया जाए, ताकि कुंभ के दौरान मेला स्पेशल और नियमित ट्रेनों के संचालन में बड़ी बाधा न आए।
30 बड़े रेल पुल पहले बनेंगे
परियोजना के तहत करीब 30 बड़े रेल पुल बनाए जाने हैं। रेलवे ने इंजीनियरिंग के स्तर पर पहले पुलों का ढांचा तैयार करने और उसके बाद पटरी बिछाने की रणनीति बनाई है। इसके अलावा सुरक्षित क्रॉसिंग और स्थानीय यातायात को सुगम बनाने के लिए 19 रेल अंडरब्रिज (RUB) और 6 रेल ओवरब्रिज (ROB) भी प्रस्तावित हैं।
12 रेलवे स्टेशनों का होगा कायाकल्प
84 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन के दायरे में आने वाले 12 रेलवे स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा। स्टेशनों के विकास और आधुनिकीकरण से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
25 गांवों की 36.68 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण
परियोजना के लिए प्रयागराज जिले में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। रेलवे मंत्रालय ने रेलवे अधिनियम के तहत भारत के राजपत्र में धारा 20ई का अंतिम गजट जारी कर दिया है। इसके तहत प्रयागराज जिले में कुल 3,66,877 वर्ग मीटर यानी करीब 36.68 हेक्टेयर निजी कृषि भूमि के अधिग्रहण को अंतिम रूप दिया गया है। शुरुआत में करीब 50.19 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव था। इसके बाद जमीन मालिकों और किसानों से दावे-आपत्तियां मांगी गईं। कुल 24 आपत्तियां दर्ज हुईं, जिनकी सुनवाई और निस्तारण के बाद पैमाइश में संशोधन कर अधिग्रहण का रकबा घटाकर 36.68 हेक्टेयर किया गया।
बारा और करछना तहसील के गांव आए दायरे में
अंतिम गजट के तहत प्रयागराज की बारा और करछना तहसील के कुल 25 गांवों की जमीन परियोजना के दायरे में आई है। इनमें बारा तहसील के जसरा, मनकवार, मुण्डेहरा, पिपरांव, अमरेहा, बारा खास, बेरुई, चंद्रा, घुरमी, हरदी, जोरवट, कपारी, खंटगिया, लोहगरा, मतरवार, सेहुड़ा, शंकरगढ़, ताला तालुका लखनपुर, नीबी, पाण्डर, चक घूरपुर, बरना, बुदावा और देवरिया शामिल हैं। करछना तहसील का चकसेमरा गांव भी इसमें शामिल है। पूरी 84 किलोमीटर परियोजना में करीब 149.3 हेक्टेयर भूमि का उपयोग होना है। इसमें प्रयागराज के अलावा मध्य प्रदेश के हिस्से की भूमि भी शामिल होगी।
पूर्वांचल-बुंदेलखंड के किसानों को भी मिलेगा लाभ
तीसरी रेल लाइन से कृषि उत्पादों की लंबी दूरी तक ढुलाई भी आसान होगी। पूर्वांचल और विंध्य-बुंदेलखंड क्षेत्र में गेहूं, चावल, अरहर, उड़द और गन्ने का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने से किसान और व्यापारी कृषि एवं डेयरी उत्पादों को मुंबई और पश्चिमी भारत के बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचा सकेंगे। इससे प्रयागराज, चित्रकूट, रीवा और आसपास के क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योगों और MSME गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।