Jitiya Vrat Kab Hai: संतान की लंबी उम्र और उसके अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए माताएं हर साल जितिया का कठिन व्रत रखती हैं। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। इस व्रत में महिलाएं दिनभर और रातभर बिना अन्न-पानी के रहती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं।

इस बार जितिया व्रत की तारीख को लेकर लोगों के बीच 2 और 3 अक्टूबर को लेकर भ्रम है। पंचांग की गणना के मुताबिक 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। इससे एक दिन पहले 2 अक्टूबर को नहाय-खाय की परंपरा पूरी होगी, जबकि व्रत का पारण 4 अक्टूबर को किया जाएगा।

2 अक्टूबर को क्या करना होगा?

जितिया व्रत सीधे निर्जला उपवास से शुरू नहीं होता। इसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं स्नान करने के बाद सात्विक भोजन करती हैं और अगले दिन के उपवास के लिए खुद को तैयार करती हैं।कई इलाकों में व्रत से पहले किए जाने वाले खास भोजन को ओठगन कहा जाता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार इसे सुबह के समय किया जाता है। उपलब्ध जानकारी में 3 अक्टूबर को सुबह करीब 4:30 बजे से पहले ओठगन पूरा करने का उल्लेख है।

3 अक्टूबर को रहेगा निर्जला उपवास

3 अक्टूबर को महिलाएं जितिया का मुख्य व्रत रखेंगी। इस दौरान पूरे दिन और रात जल तथा भोजन ग्रहण न करने की परंपरा है। शाम के समय पूजा की जाती है और भगवान जीमूतवाहन का स्मरण किया जाता है।पूजा के बाद जितिया व्रत की कथा सुनने की भी परंपरा है। व्रती महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, निरोगी जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

जीमूतवाहन से जुड़ी है व्रत की मान्यता

जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा क्यों की जाती है, इसके पीछे एक धार्मिक कथा बताई जाती है। मान्यता के अनुसार जीमूतवाहन ने नाग जाति के एक बच्चे को बचाने के लिए अपने जीवन को खतरे में डाल दिया था।उनके त्याग और बच्चे की रक्षा से जुड़ी इसी कथा को संतान की सुरक्षा और लंबी उम्र की कामना से जोड़ा जाता है। कई क्षेत्रों में जितिया के दिन चील और सियारिन से संबंधित कथा भी सुनाई जाती है।

इस तरह की जाती है जितिया की पूजा

व्रत वाले दिन स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद पूजा की जगह को साफ करके भगवान जीमूतवाहन की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित की जाती है।कुछ जगहों पर कुशा से जीमूतवाहन की आकृति बनाने की परंपरा है। वहीं मिट्टी या गोबर से चील और सियारिन की आकृति बनाकर भी पूजा की जाती है। पूजा में फूल, फल और दूसरी आवश्यक सामग्री चढ़ाई जाती है।इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा कर जितिया व्रत की कथा सुनी जाती है।

4 अक्टूबर को खुलेगा व्रत

अगले दिन यानी 4 अक्टूबर को जितिया व्रत का पारण किया जाएगा। धार्मिक परंपरा में अष्टमी तिथि पूरी होने के बाद नवमी में व्रत खोलने की बात कही गई है।पारण के समय को लेकर अलग-अलग जगहों पर थोड़ा अंतर हो सकता है, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना के अनुसार समय बदलता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने शहर के पंचांग में दिया गया समय देखना बेहतर रहेगा।

बिहार, यूपी और झारखंड में खास महत्व

जितिया का पर्व खास तौर पर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। नेपाल के कुछ क्षेत्रों में भी जीवित्पुत्रिका व्रत की परंपरा देखने को मिलती है।धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत को संतान के स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से जोड़ा गया है। यह काफी कठिन व्रत माना जाता है, क्योंकि इसमें निर्जला रहने की परंपरा है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।