ज़रा हट के
दुनिया का ऐसा पक्षी जिसे छूना भी पड़ सकता है भारी, शरीर में होता है खतरनाक जहर
दुनिया में बहुत कम पक्षी ऐसे हैं जिनमें विषैले गुण पाए जाते हैं। यही वजह है कि हूडेड पिटोहुई वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए आज भी शोध और आकर्षण का विषय बना हुआ है। प्रकृति की विविधता का यह अद्भुत उदाहरण बताता है कि जंगलों में अभी भी कई ऐसे रहस्य छिपे हैं जो लोगों को हैरान कर सकते हैं।
जब जहरीले जीवों का जिक्र होता है तो आमतौर पर सांप, बिच्छू या विषैली मकड़ियां याद आती हैं, लेकिन प्रकृति में एक ऐसा पक्षी भी मौजूद है, जिसके शरीर में जहर पाया जाता है। इस अनोखे पक्षी का नाम हुडेड पिटो हुई (Hooded Pitohui) है, जिसे दुनिया के सबसे विषैले पक्षियों में गिना जाता है। यह पक्षी मुख्य रूप से न्यू गिनी (New Guinea) के वर्षावनों में पाया जाता है। इसके काले और नारंगी रंग के पंख इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं, लेकिन इसकी यही खूबसूरती एक खतरनाक रहस्य भी छिपाए हुए है। इसके पंखों और त्वचा में ऐसे विषैले तत्व मौजूद होते हैं जो संपर्क में आने वाले व्यक्ति को असहज महसूस करा सकते हैं।
इस पक्षी में पाया जाता है बैट्राकोटॉक्सिन
इस पक्षी की विषैली प्रकृति का पता 1980 के दशक में चला। उस दौरान पक्षियों पर अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक जैक डंबाचर (Jack Dumbacher) ने इसे पकड़ने का प्रयास किया। पक्षी को संभालने के बाद उन्हें हाथों और चेहरे पर जलन तथा सुन्नता जैसी अनुभूति हुई। बाद में किए गए वैज्ञानिक परीक्षणों में यह स्पष्ट हुआ कि पक्षी के शरीर में विषैले रसायन मौजूद हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस पक्षी में बैट्राकोटॉक्सिन (Batrachotoxin) नामक शक्तिशाली विष पाया जाता है। यही विष कुछ अत्यंत जहरीले मेंढकों में भी मिलता है। यह टॉक्सिन संभावित शिकारियों को दूर रखने में मदद करता है और पक्षी की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा माना जाता है।
इस पक्षी को लेकर वैज्ञानिकों ने कही ये बात
दिलचस्प बात यह है कि हूडेड पिटोहुई स्वयं यह जहर पैदा नहीं करता। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अपने भोजन से विषैले तत्व प्राप्त करता है। इसकी खुराक में शामिल कुछ विशेष प्रकार के बीटल, विशेषकर मेलिरिड बीटल्स, इस विष के स्रोत माने जाते हैं। भोजन के माध्यम से यह विष पक्षी के शरीर में जमा होता जाता है और उसे विषैला बना देता है। इसके चमकीले रंग भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जीवविज्ञान में इसे अपोसेमेटिज्म (Aposematism)कहा जाता है, जिसमें किसी जीव के रंग संभावित शिकारियों को चेतावनी देते हैं कि वह खतरनाक या विषैला हो सकता है। यही कारण है कि स्थानीय लोग भी आमतौर पर इस पक्षी से दूरी बनाए रखते हैं।
Written By Toshi Shah
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