ज़रा हट के
जानिए इस जीव का रहस्य, जिसके हैं 32 दिमाग, 10 आंखें और 300 दांत!
धरती पर एक अनोखा जीव है, जिसके शरीर में 32 दिमाग, 10 आंखें और करीब 300 दांत होते हैं। यह बिना दर्द के खून चूसती है और खास केमिकल छोड़ती है।
दुनिया में कई जीव ऐसे हैं जिन्हें देखकर या सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। इन्हीं में एक है जोंक, जिसे कभी-कभी लोग डर या अज्ञानता के कारण ‘शैतान जैसा’ जीव भी कह देते हैं, लेकिन सच यह है कि यह छोटा-सा जीव अपने अंदर कई बेहद दिलचस्प जैविक विशेषताएं समेटे हुए है। इसके बारे में कहा जाता है कि इसमें 32 दिमाग, 10 आंखें और करीब 300 दांत होते हैं—जो सुनने में भले ही किसी कल्पना जैसा लगे, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण मौजूद हैं।
क्या वाकई जोंक में 32 दिमाग होते हैं?
दरअसल, जोंक के शरीर में 32 अलग-अलग नर्व क्लस्टर होते हैं जिन्हें गैन्ग्लिया कहा जाता है। ये छोटे-छोटे तंत्रिका केंद्र मिलकर दिमाग जैसा काम करते हैं। जोंक का शरीर कई खंडों में बंटा होता है और हर खंड में एक गैन्ग्लियन पाया जाता है। यही वजह है कि इसका शरीर अलग-अलग हिस्सों में स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता रखता है, जिससे यह जीव और भी अनोखा बन जाता है।
300 दांतों की सच्चाई
जोंक के मुंह की बनावट भी काफी दिलचस्प होती है। इसके तीन जबड़े होते हैं और हर जबड़े पर लगभग 100 छोटे-छोटे दांत होते हैं। इस तरह कुल मिलाकर इनके दांतों की संख्या करीब 300 मानी जाती है। इन्हीं दांतों की मदद से यह त्वचा को आसानी से काटकर खून चूसती है। काटने के बाद अक्सर त्वचा पर ‘Y’ आकार का निशान दिखाई देता है।
10 आंखें लेकिन सीमित दृष्टि
जोंक के सिर पर पांच जोड़ी यानी कुल 10 आंखें होती हैं, जिन्हें ओसेली कहा जाता है। हालांकि ये आंखें इंसानों की तरह स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम नहीं होतीं। ये मुख्य रूप से प्रकाश और अंधेरे के बीच अंतर पहचानने में मदद करती हैं, जिससे जोंक अपने आसपास की गतिविधियों का अंदाजा लगा लेती है और सुरक्षित रहती है।
काटने पर दर्द क्यों महसूस नहीं होता?
जब जोंक किसी जीव की त्वचा से चिपकती है और खून चूसती है, तो वह अपने लार में एक विशेष रसायन छोड़ती है। इस रसायन में ऐसे तत्व होते हैं जो दर्द का एहसास कम कर देते हैं और खून को जमने से भी रोकते हैं। इसी कारण जोंक का काटना अक्सर तुरंत महसूस नहीं होता।
चिकित्सा में जोंक का उपयोग
जोंक को केवल एक खतरनाक जीव मानना गलत होगा, क्योंकि यह चिकित्सा जगत में भी उपयोगी रही है। पुराने समय में इसे शरीर से दूषित रक्त निकालने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। आज भी आधुनिक चिकित्सा, खासकर माइक्रोसर्जरी में, रक्त संचार सुधारने के लिए इसका सीमित उपयोग किया जाता है। इस तरह यह छोटा सा जीव विज्ञान और चिकित्सा दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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