राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार (3 अगस्त 2026) को ओडिशा के कटक स्थित जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां युवा अपनी प्रतिभा का पूर्ण विकास कर सकें और अपने सपनों व आकांक्षाओं को साकार कर सकें। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ओडिशा ज्ञान, संस्कृति, आध्यात्मिकता और सेवा की समृद्ध परंपरा की धरती रही है। महाप्रभु श्रीजगन्नाथ की इस पावन भूमि ने सदियों से समावेश, करुणा और मानव-कल्याण का संदेश दिया है। उन्होंने कटक की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र मधुसूदन दास, गौरीशंकर राय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बीजू पटनायक, पंडित गोपबंधु दास और डॉ. हरेकृष्ण महताब जैसी महान विभूतियों से जुड़ा रहा है।

विकसित भारत 2047 के निर्माण में विश्वविद्यालयों की होगी अहम भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व के सबसे युवा देशों में शामिल है और यही देश की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों का दायित्व केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है जो सत्यनिष्ठा, अनुशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रहित की भावना से ओत-प्रोत हों। उन्होंने कहा कि युवाओं का ज्ञान तभी सार्थक है जब वह मानवता की सेवा, समाज के कल्याण और राष्ट्र की उन्नति का माध्यम बने, उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संकल्प को साकार करने में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विश्वविद्यालयों को ऐसे ज्ञान-केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए, जहां शोध, नवाचार और प्रौद्योगिकी के माध्यम से समाज की चुनौतियों का समाधान खोजा जाए।

कुशल मानव संसाधन तैयार करेगा जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय

राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह विश्वविद्यालय भविष्य में कुशल मानव संसाधन, शोधकर्ता और उद्यमी तैयार कर 'विकसित ओडिशा' और 'विकसित भारत' के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

Written By: M. Atharuddin Munne Bharti

Edited By : Toshi Shah