दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें मानसिक दबाव, अनुचित व्यवहार और अपमानजनक टिप्पणियां भी शामिल हैं। जब किसी कर्मचारी के साथ बार-बार ऐसी टिप्पणियां की जाती हैं, तो इसका असर उसके आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। कई मामलों में यह स्थिति तनाव, चिंता और अवसाद तक पहुंच जाती है। हाल ही में इसी तरह का एक मामला ब्रिटेन में सामने आया है, जहां एक महिला कर्मचारी को उसके बॉस की अपमानजनक टिप्पणियों के कारण अदालत से मुआवजा मिला।

आयरिश मूल का मजाक उड़ाता था बॉस

जानकारी के मुताबिक महिला कर्मचारी बर्नाडेट हेयस आयरिश मूल की हैं। उनका आरोप है कि कंपनी के निदेशक मिक एटकिंस अक्सर उनकी पहचान का मजाक उड़ाते थे। वह उन्हें “पोटैटो” (आलू) कहकर बुलाते थे, जो आयरिश लोगों के लिए अपमानजनक माना जाता है। रोजगार न्यायाधिकरण में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि बॉस ने कई बार ऑफिस में सहकर्मियों के सामने भी ऐसा कहा, इतना ही नहीं, व्हाट्सऐप संदेशों में भी उन्होंने इसी शब्द का इस्तेमाल किया।

अदालत ने माना रेसिज्म उत्पीड़न

न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में कहा कि यह सिर्फ मजाक नहीं था, बल्कि महिला कर्मचारी के साथ रेसिज्म उत्पीड़न किया गया। अदालत ने माना कि ऐसे शब्द अपमानजनक और शर्मनाक थे तथा उनका सीधा संबंध महिला की रेसिज्म पहचान से था।

मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा असर

हेयस ने अदालत में बताया कि लगातार ऐसी टिप्पणियों के कारण वह खुद को असुरक्षित और अपमानित महसूस करने लगी थीं। दफ्तर का माहौल उनके लिए इतना तनावपूर्ण हो गया था कि उन्हें पैनिक अटैक आने लगे और नींद न आने की समस्या भी होने लगी।

क्यों नहीं छोड़ी नौकरी

सुनवाई के दौरान अदालत ने उनसे पूछा कि उन्होंने नौकरी क्यों नहीं छोड़ी। इसके जवाब में हेयस ने बताया कि निजी परिस्थितियों के कारण नौकरी छोड़ना उनके लिए संभव नहीं था, इसलिए मजबूरी में उन्हें काम जारी रखना पड़ा।

मिला 29 लाख रुपये का मुआवजा

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने कंपनी को आदेश दिया कि वह महिला को चार हफ्तों के वेतन के बराबर मुआवजा दे। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 29 लाख रुपये बताई जा रही है। यह फैसला इस बात का उदाहरण है कि कार्यस्थल पर किसी भी तरह का नस्लीय या अपमानजनक व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

 Written By Toshi Shah