नई दिल्ली: 14 अक्टूबर 2026 को 20वें इंडिया एनर्जी समिट में 'भारत स्मॉल रिएक्टर' (BSR) प्रोग्राम के ज़रिए भारत की न्यूक्लियर पावर क्षमता बढ़ाने की योजना पर चर्चा हुई। इंडस्ट्री के जानकारों ने न्यूक्लियर क्षमता को बढ़ाने के लिए मज़बूत घरेलू सप्लाई चेन, प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और तेज़ी से प्रोजेक्ट पूरा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

न्यूक्लियर पावर के विस्तार से जुड़े चुनौतियों हुई चर्चा

नई दिल्ली में इंडियन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स (ICC) द्वारा आयोजित समिट के दूसरे दिन एक पैनल चर्चा हुई। इसमें न्यूक्लियर पावर के विस्तार से जुड़े मौकों और चुनौतियों पर बात की गई, जैसे रिएक्टर टेक्नोलॉजी, साइट चुनना, रेगुलेटरी मंज़ूरी, खास उपकरण और कम्युनिटी की भागीदारी। भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी न्यूक्लियर पावर क्षमता को लगभग 8.8 GW से बढ़ाकर 100 GW करना है।

लक्ष्य पाने के लिए सरकार-इंडस्ट्री की तालमेल की जरूरत

दरअसल, इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार और इंडस्ट्री के बीच तालमेल की ज़रूरत होगी, साथ ही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और कुशल वर्कफ़ोर्स भी विकसित करना होगा। 'भारत स्मॉल रिएक्टर' प्रोग्राम का मकसद इंडस्ट्री की 'कैप्टिव पावर' ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भारत की पहले से मौजूद 220 MW प्रेशराइज़्ड हेवी वॉटर रिएक्टर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना है। 'कैप्टिव पावर' का मतलब है किसी कंपनी के अपने इस्तेमाल के लिए बनाई गई बिजली। ऐसे रिएक्टर ज़्यादा ऊर्जा की खपत वाली इंडस्ट्री को चौबीसों घंटे कम-कार्बन वाली बिजली दे सकते हैं।

मुख्य उद्देश्य छोटे परमाणु रिएक्टरों का विकास

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छोटे परमाणु रिएक्टरों के विकास और उनके संभावित उपयोग को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदमों की पहचान करना है। विशेषज्ञों ने कार्यक्रम को गति देने, तकनीकी पहलुओं, नीतिगत तैयारियों और औद्योगिक भागीदारी जैसे विषयों पर चर्चा की। छोटे परमाणु रिएक्टर भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने, उद्योगों को बिजली उपलब्ध कराने और कम कार्बन उत्सर्जन वाले ऊर्जा विकल्पों को मजबूत करना है।

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