नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और ‘घास-फूल’ चुनाव चिह्न पर अधिकार की लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों गुटों को 10 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी है। ममता बनर्जी गुट और रितुराज बनर्जी गुट को चुनाव आयोग के समक्ष अपने जवाब दाखिल करने होंगे। सोमवार को जवाब देने की समयसीमा समाप्त हो रही थी।
रितुराज बनर्जी गुट ने दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन ममता बनर्जी गुट ने इसका विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को 10-10 दिन का समय दिया है।
तीन महीने में फैसला करेगा चुनाव आयोग
सुप्रीम कोर्ट पहले ही चुनाव आयोग को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर तीन महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दे चुका है।
पश्चिम बंगाल के उपचुनाव के दौरान आयोग ने दोनों गुटों को अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न दिए थे। ममता बनर्जी गुट को ‘ममता TMC’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चिह्न मिला, जबकि रितुराज बनर्जी गुट को ‘डेमोक्रेटिक TMC’ नाम और लिफाफे का चिह्न आवंटित किया गया।
अब दोनों पक्षों के जवाब और दलीलें सुनने के बाद आयोग को तय करना होगा कि पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न पर किसका दावा मान्य है।
10 विधायकों की सदस्यता पर भी सवाल
TMC के भीतर खींचतान के बीच 10 विधायकों के खिलाफ दल-बदल के आरोपों पर अयोग्यता याचिकाएं भी लंबित हैं। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई थी कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर इन याचिकाओं पर उचित समय में फैसला लेंगे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने TMC विधायक सोहनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका का निपटारा करते हुए पहले के फैसले Keisham Meghachandra Singh बनाम मणिपुर विधानसभा अध्यक्ष का हवाला दिया था। इसमें अयोग्यता याचिकाओं पर सामान्यतः करीब तीन महीने के भीतर निर्णय लेने की बात कही गई थी।
मौजूदा मामले में अयोग्यता याचिकाएं 8 जुलाई को दाखिल की गई थीं।
कपिल सिब्बल ने देरी पर उठाए सवाल
सोहनदेब चट्टोपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा था कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसले में देरी के कारण अलग हुए गुट खुद को असली राजनीतिक पार्टी बताने का दावा करने लगते हैं।
अयोग्यता की मांग जिन 10 विधायकों के खिलाफ की गई है, उनमें अरूप रॉय, रितब्रत बनर्जी, फिरहाद हाकिम, संदीपन साहा, सिउली साहा, अक्रुज्जमां, सबीना यास्मीन, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और जावेद अहमद खान शामिल हैं।
अब नजर चुनाव आयोग के फैसले पर है। दोनों गुटों को अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है, लेकिन TMC के नाम और ‘घास-फूल’ चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।