बेंगलुरु: कर्नाटक में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सियासी विवाद और गहरा गया है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि SIR से जुड़े फैसले चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों की असहमति के बावजूद आगे बढ़ाए गए। हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया को इस तरह आगे बढ़ाया गया कि आयोग के भीतर मौजूद आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया।
10 महीने में 14 बार असहमति का दावा
हरिप्रसाद के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों के दौरान SIR और इससे जुड़े फैसलों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने लगभग 14 मौकों पर असहमति जताई। उनका आरोप है कि इसके बावजूद फैसले लिए जाते रहे। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए और कहा कि संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
Form 6 में बदलाव को लेकर भी सवाल
हरिप्रसाद ने Form 6 से जुड़े बदलावों को भी विवाद का हिस्सा बताया। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में भी दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां थीं, लेकिन उन्हें दरकिनार करते हुए फैसला आगे बढ़ाया गया। Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है।
करोड़ों वोट हटाने का दावा
SIR को लेकर हरिप्रसाद ने बिहार, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा भी किया। उनके मुताबिक बिहार में करीब 63 लाख, पश्चिम बंगाल में 91 लाख और कर्नाटक में करीब 1.07 करोड़ वोट इस प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। हालांकि, ये आंकड़े हरिप्रसाद द्वारा किए गए दावे हैं, इसलिए इन्हें चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
65 हजार आवेदन दिखाने का दावा
हरिप्रसाद ने अपने आरोपों को लेकर एक और दावा किया। उन्होंने कहा कि उनके पास करीब 65 हजार ऐसे आवेदन हैं, जो कथित तौर पर डिलीट किए गए मतदाताओं से जुड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि इन आवेदनों में जरूरी हस्ताक्षर नहीं हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
CEC के इस्तीफे की मांग
हरिप्रसाद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने SIR की प्रक्रिया की जांच की मांग करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने इस मुद्दे पर आंदोलन जारी रखने की भी बात कही।
चुनाव आयोग का पक्ष भी अहम
हालांकि, इस विवाद में चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। आयोग ने पहले SIR से जुड़े फैसलों पर सामने आई असहमति की खबरों के बीच कहा था कि उसके फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर आयोग ने अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है। इसलिए हरिप्रसाद के आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।
SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है, जब कर्नाटक में मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। आने वाले दिनों में आयोग के आधिकारिक आंकड़ों और कांग्रेस की ओर से पेश किए जाने वाले दस्तावेजों पर इस विवाद की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
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