Raipur-Visakhapatnam Expressway: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच सफर जल्द ही काफी आसान और तेज होने वाला है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130CD) के पूरा होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब 12-14 घंटे से घटकर 5-6 घंटे तक होने की उम्मीद है। भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा करीब 465 किलोमीटर लंबा छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को सीधे हाईस्पीड सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा। करीब 16,482 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से मध्य भारत और पूर्वी समुद्री तट के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

597 KM की दूरी घटकर 465 KM होगी
फिलहाल रायपुर से विशाखापट्टनम जाने के लिए पुराने मार्ग से करीब 597 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है, जिसमें 12 से 14 घंटे तक लग सकते हैं। नए कॉरिडोर के जरिए दूरी करीब 132 किलोमीटर कम होकर 465 किलोमीटर रह जाएगी। छह लेन का एक्सप्रेसवे बेहतर सड़क डिजाइन और नियंत्रित प्रवेश के कारण तेज यातायात के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे रायपुर से विशाखापट्टनम पोर्ट तक माल और यात्रियों की आवाजाही भी आसान होने की उम्मीद है।

तीन राज्यों के इन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा

छत्तीसगढ़
एक्सप्रेसवे रायपुर से आगे अभनपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।

ओडिशा
ओडिशा में यह कॉरिडोर नबरंगपुर और कोरापुट जैसे क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। इससे राज्य के दक्षिणी हिस्से की सड़क कनेक्टिविटी में सुधार होगा।

आंध्र प्रदेश
आगे यह मार्ग विजयनगरम, अराकू घाटी और विशाखापट्टनम के सबावरम क्षेत्र तक पहुंचेगा।

दिल्ली और आगरा तक भी जुड़ेगा नेटवर्क
रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का फायदा सिर्फ तीन राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा। इसे देश के बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। NH-30, NH-34, NH-539, NH-44, यमुना एक्सप्रेसवे और ग्वालियर-आगरा क्षेत्र के प्रमुख सड़क नेटवर्क से कनेक्टिविटी मिलने पर रायपुर और विशाखापट्टनम की पहुंच दिल्ली, आगरा और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों तक आसान हो सकती है। वहीं, आंध्र प्रदेश के विजयनगरम क्षेत्र में यह कॉरिडोर कोलकाता-कन्याकुमारी राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से भी जुड़ता है। इससे पूर्वी और दक्षिणी भारत के बीच माल परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

95 फीसदी काम पूरा होने का दावा
रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का निर्माण कई पैकेजों में किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक परियोजना का करीब 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ओडिशा के कोरापुट सेक्शन में निर्माण कार्य काफी आगे बढ़ चुका है, जबकि छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के हिस्सों में अंतिम चरण का काम, इंटरचेंज और अन्य जरूरी ढांचे तैयार किए जा रहे हैं।

उदंती अभयारण्य के पास बन रही जुड़वां सुरंग
परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा के पहाड़ी और वन क्षेत्र में है। उदंती वन्यजीव क्षेत्र के पास करीब 2.79 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल का निर्माण किया जा रहा है। एक सुरंग का निर्माण पूरा होने की जानकारी है, जबकि दूसरी सुरंग पर भी काम जारी है। पहाड़ी और वन क्षेत्र में सुरंग निर्माण से सड़क को अपेक्षाकृत सुरक्षित और सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

दिसंबर 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर को 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूरी होने के बाद रायपुर से विशाखापट्टनम की यात्रा का समय काफी कम हो सकता है। यह कॉरिडोर सिर्फ यात्रियों के सफर को तेज करने वाली सड़क नहीं होगा, बल्कि मध्य भारत को पूर्वी समुद्री तट और दक्षिण भारत से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारा भी साबित हो सकता है। इससे उद्योग, खनिज, कृषि उत्पाद, लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह आधारित व्यापार को गति मिलने की उम्मीद है।